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    उच्च शिक्षा में गुणवत्ता नहीं तो संस्था होगी बंद — राज्यपाल हरिभाऊ बागडे

    सुधरो नहीं तो बंद करो, नेक रैंकिंग सुधार और विश्वविद्यालयों को सुदृढ़ करने के दिए निर्देश, लोकभवन में कुलगुरु समन्वय समिति बैठक सम्पन्न

    मिशनसच न्यूज, जयपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में अब “सुधरो नहीं तो बंद करो” की नीति पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता नहीं है, उन्हें बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। बिना अनुमति यदि किसी कॉलेज या शिक्षण संस्था को विश्वविद्यालय स्तर पर मान्यता दी गई है, तो उस पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    राज्यपाल बुधवार को लोकभवन जयपुर में आयोजित कुलगुरु समन्वय समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा, कुलदीप रांका सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रदेशभर के कुलगुरु उपस्थित रहे।

    राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा ही विकास की नींव है और राज्य में स्कूल स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक गुणवत्ता सुधार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालयों को सुदृढ़ करने और कुलगुरुओं का मनोबल बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।

    नेक रैंकिंग के लिए समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश

    राज्यपाल बागडे ने सभी विश्वविद्यालयों को नेक रैंकिंग सुधार के लिए प्रभावी और समयबद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कुलगुरुओं से नेक में आ रही बाधाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति, नवाचार और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़ी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण किया जाए। साथ ही राज्य सरकार स्तर पर भर्ती और वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय स्वीकृतियों से जुड़ी फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और त्वरित निर्णय सुनिश्चित किए जाएं।

    शिक्षा में संवाद और भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर

    राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने भारतीय इतिहास, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़ी शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। विश्वविद्यालयों में पुस्तकों से लुप्त महत्वपूर्ण भारतीय ज्ञान परंपरा, इतिहास और संस्कृति से जुड़े विषयों को प्रदर्शित करने तथा सप्ताह में एक बार विद्यार्थी–अध्यापक संवाद कार्यक्रम प्रारंभ करने की भी बात कही।

    वार्षिक दीक्षांत समारोह और ऑडिट अनिवार्य

    राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों में प्रतिवर्ष दीक्षांत समारोह आयोजित करने और महालेखाकार द्वारा वार्षिक ऑडिट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा गांव गोद लेकर शिक्षा, कौशल विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए प्राथमिकता से कार्य करने पर भी जोर दिया।

    रिक्त पद जल्द भरने का आश्वासन

    उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि नेक रैंकिंग के तहत शिक्षकों की भर्ती के प्रस्ताव मांगे गए हैं। रिक्त पदों का रोस्टर तैयार कर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विश्वविद्यालयों की पेंशन, भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री स्तर पर सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।

    बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका ने विश्वविद्यालयों में ग्लोबल टैलेंट रिटर्न स्कीम, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, कौशल विकास और रिक्त पद भरने की प्रक्रिया की जानकारी दी। अन्य विभागीय अधिकारियों एवं कुलगुरुओं ने भी अपने-अपने विश्वविद्यालयों की प्रगति से अवगत कराया।

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