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    एक लाख की रिश्वत मांगने पर तत्कालीन थानाधिकारी और दलाल को 4-4 साल की सजा

    एसीबी अदालत का फैसला: दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना, नारायणपुर थाने से जुड़ा है वर्ष 2020 का मामला

    अलवर। भ्रष्टाचार के मामले में अलवर की एसीबी अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए नारायणपुर थाने के तत्कालीन थानाधिकारी जितेन्द्र कुमार और उसके कथित दलाल बलवीर सिंह यादव को चार-चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। एसीबी कोर्ट की मजिस्ट्रेट अनु चौधरी ने मामले की सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया।

    मामला वर्ष 2020 का है। परिवादी कृष्ण कुमार की शिकायत के आधार पर सामने आए इस प्रकरण में आरोप था कि एक पारिवारिक मामले में पक्ष में कार्रवाई करने और दूसरे पक्ष के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के बदले एक लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी।

    भांजे की शादी से जुड़े मामले में थाने पहुंचा था परिवादी

    शिकायत के अनुसार, परिवादी कृष्ण कुमार के भांजे संदीप की शादी सोनाली गंगावत से हुई थी। सोनाली के पिता की ओर से उसे भगाकर ले जाने के संबंध में शिकायत दी गई थी। इसके बाद नारायणपुर थाना पुलिस संदीप और सोनाली को थाने लेकर आई थी।

    परिवादी के मुताबिक, 8 जनवरी 2020 को वह नारायणपुर थाने पहुंचा और तत्कालीन थानाधिकारी जितेन्द्र कुमार से मुलाकात की। इस दौरान थानाधिकारी ने संदीप को जेल भेजने की धमकी दी। परिवादी ने दोनों के विवाह से संबंधित दस्तावेज दिखाकर अपना पक्ष रखने का प्रयास किया।

    दलाल के माध्यम से मांगी गई थी एक लाख रुपए की रिश्वत

    परिवादी की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि संदीप और सोनाली के पक्ष में कार्रवाई करने तथा उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के बदले तत्कालीन थानाधिकारी जितेन्द्र कुमार ने कथित दलाल बलवीर सिंह यादव के माध्यम से एक लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के अनुसार, रिश्वत की राशि बलवीर यादव को देने के लिए कहा गया था।

    अदालत ने दोनों को सुनाई चार-चार साल की सजा

    मामले में एसीबी की जांच और न्यायालय में चली सुनवाई के बाद अदालत ने तत्कालीन थानाधिकारी जितेन्द्र कुमार और बलवीर सिंह यादव को दोषी ठहराते हुए चार-चार साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।

    एसीबी अदालत का यह फैसला रिश्वतखोरी के मामलों में न्यायिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण है। पुलिस पद पर रहते हुए रिश्वत मांगने के आरोप में दोषसिद्धि और सजा से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश गया है।

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