अगरतला। त्रिपुरा राज्य के बॉक्सानगर अंतर्गत आशाबाड़ी सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों पर हुए कायराना हमले के मामले में स्थानीय पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए कुल आठ आरोपियों को दबोच लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जानकारी साझा की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश की रक्षा करने वाले जवानों पर हाथ उठाने वाले किसी भी असामाजिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा और इस जघन्य कृत्य में संलिप्त सभी दोषियों को कानून के शिकंजे में कसकर कठोरतम सजा दिलाई जाएगी।
सीमा पार से तस्करी रोकने के दौरान बीएसएफ जवानों पर हुआ हमला
प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह पूरी घटना सोमवार की सुबह करीब नौ बजे आशाबाड़ी बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) के पास अंतरराष्ट्रीय कंटीली तारबंदी के गेट संख्या 174 और 175 के नजदीक उस वक्त घटी जब कुछ संदिग्ध तस्कर अवैध रूप से सामान की आवाजाही को अंजाम देने की फिराक में थे। ड्यूटी पर मुस्तैद बीएसएफ की 49वीं बटालियन के जवानों ने जब इन तस्करों की संदिग्ध गतिविधियों को भांपकर उनका पीछा किया, तो वे अलग-अलग दिशाओं में भाग खड़े हुए। हालांकि, मुस्तैद जवानों ने पीछा करते हुए लगभग चार सौ मीटर की दूरी पर एक कथित तस्कर हिफजुर रहमान को धर दबोचा। इसी बीच, रहीमपुर कांतामुरा बीओपी से एक सरकारी वाहन में सवार होकर तीन अन्य बीएसएफ जवान बॉक्सानगर की ओर जा रहे थे, और जैसे ही वे नाकाबंदी वाले स्थान पर पहुँचे, घात लगाए बैठे तस्करों के एक उग्र समूह ने उन पर अचानक हमला बोल दिया।
मारपीट, हथियार छीनने का प्रयास और वाहन में तोड़फोड़
प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो फुटेज से यह स्पष्ट हुआ है कि हमलावरों ने निहत्थे नजर आ रहे जवानों के साथ अत्यंत क्रूरता से मारपीट की, जिससे उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उग्र भीड़ ने जवानों को जमीन पर गिराकर उनकी आधिकारिक सर्विस राइफल्स छीनने का कुत्सित प्रयास भी किया। इसके साथ ही, जवानों के आवागमन के लिए प्रयुक्त किए जा रहे सरकारी वाहन में भी जमकर तोड़फोड़ की गई। इस दुस्साहसिक घटना के बाद से पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल व्याप्त है, और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।


