नई दिल्ली। देश में अवैध अप्रवासन और घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए तीन करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों के बयान को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में घमासान छिड़ गया है। इस संवेदनशील विषय को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। जहाँ एक ओर भाजपा नेताओं का यह कड़ा आरोप है कि विपक्ष अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं ने गृह मंत्री के इस दावे पर सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि यदि देश में इतनी भारी संख्या में घुसपैठिये मौजूद हैं, तो अब तक सरकार द्वारा उनके विरुद्ध क्या ठोस कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है।
कांग्रेस पार्टी की चुनौती और दस्तावेजों की मांग
विपक्ष की ओर से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता उदित राज ने केंद्रीय गृह मंत्री को उनके इस दावे के समर्थन में पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य सार्वजनिक करने की खुली चुनौती दी है। उन्होंने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि यदि देश के भीतर तीन करोड़ अवैध घुसपैठिये छिपे हुए हैं, तो सरकार को उनकी एक आधिकारिक डिजिटल सूची बनाकर सार्वजनिक करनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि पिछले लगभग साढ़े बारह वर्षों से केंद्र की सत्ता में काबिज होने के बावजूद सरकार अब तक इन कथित घुसपैठियों की शिनाख्त कर उन्हें देश की सीमाओं से बाहर खदेड़ने में पूरी तरह असफल क्यों रही है?
समाजवादी पार्टी की आपत्ति और पूर्वजों के इतिहास का हवाला
इस राजनीतिक विवाद में कूदते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी गृह मंत्री के बयान की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि शायद गृह मंत्री या प्रशासनिक तंत्र के पास इस बात की सटीक और वास्तविक जानकारी का अभाव है कि वास्तव में घुसपैठिया किसे कहा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस देश की स्वतंत्रता के लिए अनगिनत लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया है और इस देश की मिट्टी में अनगिनत नागरिकों के पूर्वज दफन हैं। ऐसे में बिना किसी पुख्ता और स्पष्ट आधार के देशवासियों को घुसपैठिया करार देना पूरी तरह अनुचित है और कोई भी बयान देने से पूर्व जमीनी तथ्यों को भली-भांति समझ लेना आवश्यक है।
भाजपा का पलटवार और जनसांख्यिकी बदलाव का दावा
विपक्षी दलों के तीखे हमलों का जवाब देते हुए भाजपा के झारखंड प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का पुरजोर समर्थन किया और अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर हो रही अवैध घुसपैठ के कारण झारखंड राज्य के कई सीमावर्ती इलाकों की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) में खतरनाक रूप से बदलाव आ चुका है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि झारखंड में संताल आदिवासी समुदाय की जो आबादी वर्ष 1951 में लगभग 44 प्रतिशत हुआ करती थी, वह वर्ष 2011 की जनगणना में घटकर मात्र 28 प्रतिशत पर आ गई है। इसके विपरीत, इसी समयांतराल में संबंधित क्षेत्रों की मुस्लिम आबादी 9 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 23 प्रतिशत तक पहुँच गई है। भाजपा प्रवक्ता ने इन असंतुलित डेमोग्राफिक बदलावों के लिए सीधे तौर पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों तथा झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थ और वोट बैंक के लालच में अवैध प्रवासियों को शरण दी गई, जिनकी मदद से यहाँ तक कि फर्जी पहचान पत्र भी तैयार करवा लिए गए।


