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    किशनगढ़बास क्षेत्र में सातवें दिन भी जारी रही राष्ट्रीय जन जागरण ज्योति कलश यात्रा

    किशनगढ़बास  क्षेत्र में राष्ट्रीय जन जागरण ज्योति कलश यात्रा सातवें दिन भी जारी रही। दीप यज्ञ, संस्कारों की शिक्षा और गायत्री साधना के संदेश से ग्रामीण हुए प्रेरित।

    मिशनसच न्यूज, किशनगढ़ बास ।
    अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा संचालित राष्ट्रीय जन जागरण ज्योति कलश यात्रा का सिलसिला सातवें दिन भी निरंतर जारी रहा। शनिवार सुबह यात्रा की शुरुआत चमरोधा गांव से हुई, जहां बड़ी संख्या में महिलाओं ने मंगल गीत गाकर कलश यात्रा का स्वागत किया और पूजन-अर्चन किया।

    जिला संयोजक रामकिशन मीणा ने बताया कि किशनगढ़ स्थित गायत्री मंदिर में सभी संस्कार निःशुल्क करवाए जाते हैं। सूचना मिलने पर गायत्री परिजन घर पर जाकर भी संस्कार कराते हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को संस्कार करवाने चाहिए क्योंकि “95 प्रतिशत संस्कार बच्चे को जन्म से पहले ही मिल जाते हैं।”

    यात्रा चमरोधा से निकलकर लंगड़वास, तीतर का मोठउ, मुसाखेड़ी, घासोली होते हुए बंबोरा पहुंची। यहां विशाल दीप यज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गायत्री परिवार के संदेश को आत्मसात किया।

    शांतिकुंज प्रतिनिधि जितेंद्र सिंह जादौन ने उद्बोधन देते हुए कहा कि गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा दिया गया युग साहित्य कल्पवृक्ष, कामधेनु और पारस पत्थर के समान है। यह बच्चों में एकाग्रता बढ़ाने और उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि “सतयुग में हमारी सनातन संस्कृति गायत्री साधना करती थी। यदि कलयुग में भी हम गायत्री साधना को जीवन में अपनाएं तो यह कलयुग भी सतयुग में बदल सकता है।”

    इस मौके पर खेलूं राम, कृष्ण गोपाल यादव, बाबूलाल, बिन्नू अग्रवाल, संजय भगत, हीरालाल गुप्ता, रामकिशोर गोद, लोकेश गुप्ता, गिरधारीलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

    यात्रा के दौरान सेवा दे रहे गायत्री परिजन सरपंच प्रकाशचंद सांवरिया, मोतीलाल गुप्ता, विकास यादव, संजय खंडेलवाल, प्रेम सांवरिया, प्रधानाध्यापक मुकेश तिवारी ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि आज के परिवेश में गायत्री साधना ही जीवन को संतुलन और सकारात्मकता प्रदान करने का सबसे कारगर उपाय है।

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