मुकेश सोनी, किशनगढ़बास।
सिंधी समाज की सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा के संरक्षण हेतु किशनगढ़बास में पूज्य सिंधी पंचायत एवं भारतीय सिंधु सभा के संयुक्त तत्वावधान में 11 दिवसीय सिंधी बाल संस्कार शिविर का शुभारंभ किया गया।
शिविर का उद्घाटन संत कंवर राम हरि मंदिर परिसर में इष्टदेव भगवान झूलेलाल एवं मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
शिविर की विशेषताएँ:
तारीख: 15 जून से 25 जून तक
आयु वर्ग: 5 से 15 वर्ष के बच्चे
स्थान: संत कंवर राम हरि मंदिर, किशनगढ़बास
नामांकन: प्रथम दिन तक 105 बच्चों का नामांकन, जिनमें हनुमानगढ़, जयपुर, कोटा, अजमेर, अलवर से आए बच्चे भी शामिल
उद्घाटन अवसर पर मौजूद रहे गणमान्यजन:
शिविर के उद्घाटन अवसर पर पूज्य सिंधी पंचायत के मुखी गोकुलदास मृगवानी, बहराणा मंडल के बाबा बाबूलाल चंदनानी, सेवानिवृत्त डॉ. युधिष्ठिर पमनानी, समाजसेवी दौलत भारती, व्यापार महासंघ अध्यक्ष परमानंद लख्याणी, सरपंच जनैश भूटानी, लायंस क्लब अध्यक्ष डॉ. राजेश पमनानी सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।
शिविर में क्या सिखाया जाएगा?
सिंधी समाज के शिक्षकों द्वारा बच्चों को सिंधी भाषा, संस्कार, योग, गायन, एवं खेलकूद की शिक्षा दी जाएगी। प्रशिक्षण देने वाले प्रमुख शिक्षक हैं:
सुभाषचंद्र दासवानी, विक्की बत्रा, रुचि हरवानी, शारदा बत्रा, जागृति आडवानी, हिमांशी मंघनानी, आशु हरवानी और हिमानी धिंगाणी।
भामाशाहों का सहयोग भी सराहनीय:
शिविर के दौरान बच्चों को प्रतिदिन अल्पाहार एवं पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रथम दिन अल्पाहार की व्यवस्था व्यापार महासंघ अध्यक्ष परमानंद लख्याणी द्वारा की गई।
समाज की व्यापक भागीदारी:
शिविर में भारतीय सिंधु सभा के अध्यक्ष प्रभु दयाल चंदनानी, चतुर्भुज बजाज, राजेश कामदार, मनीष भूटानी, नेभराज बतरा, राजा वलेचा, संजय बजाज, सुनील वलेचा सहित सैकड़ों सिंधी समाज के सदस्य शामिल हुए।
यह शिविर सिंधी समाज की सांस्कृतिक धरोहर और मातृभाषा को जीवित रखने की एक सराहनीय पहल है, जो बालकों में संस्कार, अनुशासन और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करेगा।


