पुस्तकालयों की बदलती भूमिका पर विशेषज्ञों ने रखे विचार, एआई और डिजिटल तकनीक पर हुआ मंथन
नौगांवा। कृषि महाविद्यालय नौगांवा में राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के अवसर पर पुस्तकालयों, मीडिया पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के संघ के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर के ऑनलाइन सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पद्मश्री प्रो. डॉ. एस. आर. रंगनाथन के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में अमूल्य योगदान और उनकी विरासत को स्मरण करते हुए आयोजित किया गया।
राष्ट्रीय ऑनलाइन सेमिनार में देशभर से पुस्तकालयाध्यक्षों, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के पेशेवरों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा सूचना विशेषज्ञों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में डिजिटल युग में पुस्तकालयों की बदलती भूमिका, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन, शोध सहायता सेवाओं और सूचना साक्षरता जैसे समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कृषि महाविद्यालय नौगांवा, एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर की अधिष्ठाता प्रो. डॉ. सुमन खंडेलवाल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों और पुस्तकालयों की शिक्षा एवं शोध में भूमिका पर प्रकाश डाला।
एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. डॉ. एल. आर. यादव ने अपने संबोधन में आधुनिक तकनीकों के अनुरूप पुस्तकालय सेवाओं को विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव के साथ पुस्तकालय व्यवसाय के मूल्यों और मूल उद्देश्य को बनाए रखना भी जरूरी है।
एआई के दौर में पुस्तकालयों की नई भूमिका पर चर्चा
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सुखदेव सिंह ने “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में एकेडमिक लाइब्रेरीज़ की नई सोच” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शैक्षणिक पुस्तकालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की संभावनाओं और पुस्तकालय एवं सूचना पेशेवरों के लिए नई तकनीकी दक्षताओं के विकास की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. सत्य प्रकाश ने “नेचर स्केपिंग™ और कम्युनिटी लाइब्रेरीज़: एआई के दौर में अगली पीढ़ी के लिए लाइब्रेरीज़ को ज्ञान के इकोसिस्टम के तौर पर नए सिरे से सोचना” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने बदलते तकनीकी परिवेश में सामुदायिक पुस्तकालयों की भूमिका और उन्हें ज्ञान के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर विचार रखे।
वहीं डॉ. धर्मवीर ने “समुदाय के लिए पुस्तकालय और मीडिया पुस्तकालयों की भूमिका” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने समुदाय, पुस्तकालय और मीडिया पुस्तकालयों के बीच बदलते संबंधों तथा समाज में उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
वरिष्ठ पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान पेशेवरों का सम्मान
समारोह का प्रमुख आकर्षण पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पेशेवरों का सम्मान रहा। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में आजीवन समर्पित योगदान के लिए ओम प्रकाश पाराशर तथा बोधू राम जाट को सम्मानित किया गया।
इसी क्रम में उत्कृष्ट पुस्तकालय सेवाओं एवं पेशेवर योगदान के लिए डॉ. प्रदीप कौर को “सर्वश्रेष्ठ महिला लाइब्रेरियन” तथा डॉ. जितेंद्र सिंह को “सर्वश्रेष्ठ पुरुष लाइब्रेरियन” के सम्मान से अलंकृत किया गया।
पुस्तकालय ज्ञान और डिजिटल साक्षरता के केंद्र
कार्यक्रम के अंत में डॉ. ममता आम्रपुरी ने सेमिनार की रिपोर्ट प्रस्तुत की। आयोजन सचिव डॉ. श्रीमती विनय सिंह कश्यप ने धन्यवाद ज्ञापित किया। देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से अपने अनुभव और विचार साझा किए।
राष्ट्रीय स्तर के इस ऑनलाइन सेमिनार ने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में विचारों के आदान-प्रदान, नवीन तकनीकों की समझ और भविष्य की पुस्तकालय सेवाओं की दिशा पर सार्थक चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम में यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि पुस्तकालय आज भी ज्ञान, शिक्षा, शोध और सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। बदलते तकनीकी परिवेश में पुस्तकालयाध्यक्षों की भूमिका विश्वसनीय सूचना उपलब्ध कराने, डिजिटल साक्षरता बढ़ाने, शोध सहायता प्रदान करने और आजीवन अधिगम को प्रोत्साहित करने में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
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