दो दिवसीय आयुर्वेद कार्यशाला में क्षारकर्म और विद्धकर्म उपचार पद्धति पर विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण
कोटा। विश्व आयुर्वेद परिषद, चिकित्सक प्रकोष्ठ चित्तौड़ प्रांत की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला का भव्य शुभारंभ राजकीय वैद्य दाऊदयाल जोशी आयुर्वेद महाविद्यालय के धन्वंतरि सभागार में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ला ने भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त निदेशक कोटा संभाग डॉ. अंजना शर्मा, विभागीय चिकित्सक संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. मृगेंद्र जोशी, प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा विशिष्ट अतिथि रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने की।
विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रदेश प्रभारी एवं आयोजन अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह शेखावत ने बताया कि कार्यशाला में देशभर से आए 400 से अधिक चिकित्सकों ने भाग लिया। महासचिव डॉ. विनोद गौतम ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धति क्षारकर्म एवं विद्धकर्म का सैद्धांतिक और प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ डॉ. अनंत ए. पांडिया और डॉ. अनमोल उत्तम बनसोडे ने लाइव उपचार के माध्यम से चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया। आयोजन अध्यक्ष डॉ. निरंजन गौतम ने बताया कि क्षारकर्म के माध्यम से नेजल पोलिप एवं नाक के बढ़े मांस का बिना सर्जरी उपचार किया गया। वहीं विद्धकर्म पद्धति से माइग्रेन, साइटिका, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, फ्रोजन शोल्डर, टेनिस एल्बो, अस्थमा, पीसीओडी, एलोपेसिया और अन्य वात रोगों के उपचार की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ला ने कहा कि विश्व आयुर्वेद परिषद वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि क्षारकर्म एवं विद्धकर्म जैसी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों से कई रोगों में सर्जरी से बचाव संभव है और प्रशिक्षित चिकित्सक देशभर में रोगियों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला चिकित्सकों के कौशल विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर महेश व्यास, डॉ. किशोरी लाल शर्मा, डॉ. रामतीर्थ शर्मा, डॉ. बाबूलाल बराला, डॉ. संजय नागर, डॉ. जगदीश राजावत, डॉ. रिड़मल सिंह राठौड़, डॉ. महेश इंद्रा, डॉ. ऋषि तिवाड़ी सहित संगठन के अनेक पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।
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