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    जयपुर में व्यक्तित्व विकास के साथ अनुशासन, समरसता और राष्ट्रभावना का अभ्यास

    संघ शिक्षा वर्ग में हो रहा व्यक्तित्व निर्माण का व्यापक प्रशिक्षण

    जयपुर। आदर्श विद्या मंदिर, मालवीय नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संघ शिक्षा वर्ग (विशेष) 21 मई से 5 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ग में जयपुर प्रांत के विभिन्न जिलों से आए 40 से 65 वर्ष आयु वर्ग के 167 स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं। वर्ग के माध्यम से स्वयंसेवकों को अनुशासन, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभावना, श्रम साधना तथा उच्च नैतिक मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    वर्ग में विभिन्न सत्रों के माध्यम से स्वयंसेवक श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण की साधना में जुटे हुए हैं। साथ ही समाज के वंचित वर्गों के प्रति सेवा भाव विकसित करने, प्रभावी संपर्क एवं प्रचार के व्यवहारिक तरीकों को सीखने का भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

    व्यक्तित्व विकास के लिए विविध विषयों पर प्रशिक्षण

    संघ शिक्षा वर्ग में पर्यावरण संरक्षण, गौ सेवा, ग्राम विकास, धर्म जागरण, सामाजिक समरसता तथा कुटुंब प्रबोधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से स्वयंसेवकों को समाज जीवन में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    वर्ग का उद्देश्य केवल शारीरिक दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और समाजहित के कार्यों के लिए सक्षम, जागरूक एवं संवेदनशील व्यक्तित्व का निर्माण करना है।

    ऐसी होती है संघ शिक्षा वर्ग की दिनचर्या

    वर्ग में सामूहिक सूचना एवं कालांश परिवर्तन सीटी के माध्यम से किया जाता है। स्वयंसेवकों का जागरण प्रतिदिन प्रातः 4:15 बजे होता है। दैनिक नित्यकर्म के बाद सभी स्वयंसेवक सामूहिक रूप से एकात्म स्तोत्र का पाठ करते हैं।

    प्रातःकालीन संघ स्थान का समय सुबह 5:20 से 6:30 बजे तथा सायंकालीन संघ स्थान का समय 6:15 से 7:15 बजे तक निर्धारित है। इन सत्रों में विभिन्न प्रकार के शारीरिक अभ्यास, खेल एवं बौद्धिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इसके बाद योग और प्राणायाम का सामूहिक अभ्यास कराया जाता है।

    स्नान एवं अन्य दैनिक कार्यों के पश्चात संवाद, चर्चा और बौद्धिक सत्रों के माध्यम से स्वयंसेवकों में नैतिक एवं बौद्धिक गुणों का विकास किया जाता है। वर्ग में दोपहर का भोजन 12:15 बजे और रात्रि भोजन 8 बजे कराया जाता है।

    समरसता और अनुशासन की अनूठी मिसाल

    वर्ग की भोजन व्यवस्था सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। भोजन समाज के विभिन्न वर्गों से बिना किसी जाति-पाति के भेदभाव के प्राप्त होता है। सभी स्वयंसेवक निर्धारित समय में अनुशासित ढंग से भोजन ग्रहण करते हैं।

    रात्रि 9 बजे से 10 बजे तक प्रतिभा प्रगटीकरण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें देशभक्ति और राष्ट्र चेतना से ओतप्रोत प्रस्तुतियां दी जाती हैं। इसके बाद सभी स्वयंसेवक रात्रि 10 बजे शयन के लिए जाते हैं।

    सेवा और श्रम साधना से मिलती है आत्मनिर्भरता की प्रेरणा

    संघ शिक्षा वर्ग में स्वयंसेवक अपने सभी कार्य स्वयं करते हैं। भोजन के बर्तन साफ करना, कपड़े धोना, अपने कक्ष, बरामदे, मैदान, शौचालय और स्नानागार की सफाई जैसे कार्य स्वयंसेवकों द्वारा किए जाते हैं।

    विशेष रूप से स्वयंसेवक अपने बर्तनों को बालू और रेत से साफ कर जल संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से उनमें श्रम का सम्मान, आत्मनिर्भरता और सेवा भाव विकसित होता है।

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