जैन यात्री सम्मेद शिखर जाते है पर ट्रेन नहीं है
मिशनसच न्यूज, अलवर। जैन धर्मावलम्बियों के झारखण्ड स्थित सर्वोच्च सिद्ध क्षेत्र सम्मेद शिखर (पारसनाथ) तथा युवाओं के प्रमुख रोजगार केंद्र हैदराबाद और बैंगलुरू के लिए अलवर से सीधी रेल सेवा नहीं होने से आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर अलवरवासियों में लगातार असंतोष देखा जा रहा है।
जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि अलवर से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु नियमित रूप से सम्मेद शिखर की यात्रा करते हैं, लेकिन सीधी ट्रेन सुविधा के अभाव में उन्हें पहले दिल्ली या जयपुर जाना पड़ता है। इसके बाद वहां से पारसनाथ स्टेशन के लिए ट्रेन पकड़नी होती है, जिससे यात्रियों का समय और धन दोनों व्यर्थ होता है।
उन्होंने कहा कि यदि अलवर से सम्मेद शिखर के लिए एक भी सीधी रेल सेवा शुरू कर दी जाए, तो जैन समाज की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकता है। इससे वे श्रद्धालु भी यात्रा कर सकेंगे, जो अभी तक सीधी ट्रेन सुविधा के अभाव में सम्मेद शिखर नहीं जा पा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि सम्मेद शिखर जैन धर्म का अत्यंत पवित्र तीर्थ है, जहां से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया, इसके बावजूद इस दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हो पाई है।
इसी प्रकार हैदराबाद और बैंगलुरू के लिए भी अलवर से सीधी रेल सेवा नहीं होने से यहां के युवाओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आईटी और औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के लिए इन शहरों में जाने वाले युवाओं को बार-बार ट्रेन बदलनी पड़ती है, जिससे उनका समय अनावश्यक रूप से नष्ट होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इन रेल सेवाओं की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अलवर से सांसद केन्द्रीय मंत्री होने के बावजूद इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। अलवरवासियों ने मांग की है कि आगामी रेल बजट में अलवर से सम्मेद शिखर, हैदराबाद और बैंगलुरू के लिए सीधी ट्रेन सेवाओं की घोषणा कर उन्हें शीघ्र प्रारंभ किया जाए, ताकि अलवर सहित आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सके।
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