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    जैन संतों पर टिप्पणी से विवाद, बयान पर समाज ने जताई नाराजगी

    टिप्पणी को लेकर विरोध, माफी और प्रमाण सार्वजनिक करने की उठी मांग

    लक्ष्मणगढ़। भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के एक कथित बयान को लेकर जैन समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। लक्ष्मणगढ़ सहित विभिन्न स्थानों पर समाज के लोगों ने बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे जैन धर्म और जैन संतों की परंपरा के विरुद्ध बताया है।

    समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि जैन धर्म की मूल भावना “अहिंसा परमो धर्म” पर आधारित है और जैन संत अपने जीवन में सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव की रक्षा का प्रयास करते हैं। उनका कहना है कि ऐसे धर्म और उसके संतों के संबंध में हिंसा से जुड़े आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से गलत और भावनाओं को आहत करने वाला है।

    जैन समाज के सदस्यों ने मांग की है कि संबंधित बयान के समर्थन में यदि कोई तथ्य या प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि यदि ऐसे आरोप प्रमाणित नहीं किए जा सकते, तो सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जानी चाहिए।

    समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि जैन धर्म की शिक्षाएं जीवदया, करुणा और अहिंसा पर आधारित हैं तथा किसी भी प्रकार के आरोप लगाने से पहले इन सिद्धांतों को समझना आवश्यक है। उन्होंने अपील की कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को संवेदनशील धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करते समय तथ्यात्मक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

    सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर भी इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जहां अनेक लोगों ने जैन समाज की भावनाओं का सम्मान करने और विवादित टिप्पणियों से बचने की बात कही है।

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