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    त्योहारों में महंगी हुई दालें, लक्ष्मणगढ़ में बिगड़ा रसोई का बजट

    अरहर दाल 150 और उड़द दाल 160 रुपये किलो पहुंची, बढ़ती कीमतों से मध्यमवर्गीय परिवार परेशान

    लक्ष्मणगढ़। त्योहारों का मौसम शुरू होते ही दालों की कीमतों में तेजी आने से आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ कस्बे में पिछले दिनों विभिन्न दालों के भाव में 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ोतरी होने की जानकारी सामने आई है। बाजार में अरहर की दाल 150 रुपये और उड़द की दाल 160 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। पहले से महंगी सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के बीच दालों के बढ़ते दाम ने मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।

    दालें रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू खर्च पर पड़ रहा है। खासकर उन परिवारों के लिए महीने का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है, जिनकी आमदनी सीमित है और जिन्हें जरूरी सामान खरीदने में भी हिसाब लगाना पड़ रहा है।

    अरहर 150 और उड़द 160 रुपये किलो

    लक्ष्मणगढ़ के बाजार में अरहर की दाल करीब 150 रुपये प्रति किलो और उड़द की दाल 160 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। स्थानीय स्तर पर विभिन्न दालों के भाव में पिछले दिनों 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ोतरी की बात सामने आई है। इससे उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है।

    सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं के दाम पहले से घरेलू बजट पर दबाव बना रहे हैं। अब दालों की कीमतें बढ़ने से रोजाना के भोजन का खर्च भी बढ़ गया है।

    मांग और आवक में अंतर को बता रहे वजह

    किराना व्यापारी मनोज कुमार और उदय चंद के अनुसार, मौसम में उतार-चढ़ाव और बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचने की वजह से बाजार में दालों की आवक प्रभावित हुई है। वहीं, त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कीमतों में तेजी आई है।

    व्यापारियों का कहना है कि मांग के मुकाबले आपूर्ति कम रहने पर बाजार में भाव बढ़ने का दबाव बनता है। हालांकि, अलग-अलग किस्मों और दुकानों पर दालों की कीमतों में अंतर हो सकता है।

    गृहणियों की चिंता—महीने का खर्च संभालना मुश्किल

    गृहणी रामा देवी ने बताया कि दाल रोजमर्रा के भोजन का जरूरी हिस्सा है। पहले से सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़े हुए हैं। ऐसे में त्योहारों के समय दालें महंगी होने से महीने का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।

    वहीं, गृहणी उषा गुप्ता ने कहा कि त्योहारों के दौरान घर का खर्च वैसे ही बढ़ जाता है। दालों की कीमतों में बढ़ोतरी से परेशानी और बढ़ गई है। महंगाई के चलते अब जरूरी सामान खरीदने से पहले भी सोचना पड़ता है।

    आम परिवारों पर बढ़ रहा खर्च का दबाव

    दालों के बढ़ते भाव का असर केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवारों के पूरे मासिक बजट पर पड़ रहा है। बढ़ती कीमतों के बीच उपभोक्ताओं को घरेलू खर्च का हिसाब नए सिरे से बनाना पड़ रहा है।

    त्योहारों के दौरान खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में उपभोक्ता बाजार भाव पर नजर रख रहे हैं और जरूरी घरेलू सामान की खरीदारी सोच-समझकर कर रहे हैं।

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