खंडेलवाल धर्मशाला के पास लगा शिविर, 100 से अधिक लोगों ने ग्रहण की खीर
लक्ष्मणगढ़। अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ कस्बे में शरद पूर्णिमा के अवसर पर वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत औषधीय खीर का वितरण किया गया। बैद्यनाथ के सौजन्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं की ओर से खंडेलवाल धर्मशाला के पास सोमवार तड़के सुबह 4 से 7 बजे तक शिविर आयोजित किया गया। इसमें खीर के साथ आयुर्वेदिक औषधि का सेवन कराया गया। आयोजकों के अनुसार, शिविर में 100 से अधिक लोगों ने खीर ग्रहण की।
शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में खीर रखने और अगले दिन उसमें औषधीय दवा मिलाकर वितरित करने की परंपरा को लेकर कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों में उत्साह रहा। सुबह से ही लोग शिविर स्थल पर पहुंचने लगे। आयोजकों के मुताबिक, हर साल इस आयोजन में दमा, पुरानी खांसी और एलर्जी जैसी समस्याओं से परेशान लोग खीर का सेवन करने आते हैं।
बीस वर्षों से जारी है आयोजन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता भुवनेश खूटेटा ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर खीर में औषधीय दवा मिलाकर वितरित करने की परंपरा पिछले कई वर्षों से निभाई जा रही है। उनके अनुसार, इस आयोजन में शामिल होने के लिए लोग साल भर इंतजार करते हैं और शरद पूर्णिमा के अगले दिन कस्बे के साथ दूर-दराज के गांवों से भी पहुंचते हैं।
आयोजकों का कहना है कि खीर को रात भर चांदनी में रखा जाता है और सुबह उसमें जड़ी-बूटियों से तैयार औषधि मिलाकर लोगों को दी जाती है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. गजराज सिंह ने बताया कि पिछले करीब 20 वर्षों से इस प्रकार औषधीय खीर का वितरण किया जा रहा है।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार किया जाता है सेवन
धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी खीर का विशेष महत्व बताया जाता है। इसी मान्यता के आधार पर खीर में औषधीय दवा मिलाकर लोगों को दी जाती है। आयोजकों के अनुसार, इसका सेवन करने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
कुछ लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे कई वर्षों से इस आयोजन में आकर खीर का सेवन कर रहे हैं और उन्हें इससे राहत महसूस हुई है। हालांकि, ऐसे व्यक्तिगत अनुभवों से किसी बीमारी के इलाज या स्थायी रूप से ठीक होने की पुष्टि नहीं होती।
चिकित्सकीय सलाह और उपचार जरूरी
दमा, सांस संबंधी परेशानी, पुरानी खांसी और एलर्जी जैसी बीमारियों में उचित चिकित्सकीय जांच और उपचार जरूरी है। औषधीय खीर को डॉक्टर की सलाह से चल रहे उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए। किसी भी दवा या जड़ी-बूटी का सेवन करने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
लक्ष्मणगढ़ में आयोजित इस शिविर में पारंपरिक धार्मिक मान्यता के अनुसार लोगों को औषधीय खीर वितरित की गई। आयोजन के दौरान कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने इसमें भाग लिया।
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