राजस्थान में दलित इंजीनियर को न्याय का मुद्दा, सरकार पर तीखा हमला
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर राज्य की भाजपा सरकार को घेरते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दलित इंजीनियर जगनलाल बैरवा को न्याय दिलाने के बजाय पूरा सिस्टम इस मामले को “फुटबॉल” की तरह इधर-उधर घुमा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।
जूली ने कहा कि एक ओर सरकार न्याय और सुशासन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कब तक दलित समाज को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ेगा और कब तक इस तरह के मामलों में देरी होती रहेगी।
निष्पक्ष जांच को लेकर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह मामला सत्ताधारी दल के विधायक से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, ऐसे में यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है ताकि पीड़ित इंजीनियर जगनलाल बैरवा पर किसी भी प्रकार का दबाव न डाला जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि एक हाईलेवल कमेटी इस मामले की जांच कर रही है, तो उसकी समयसीमा तय क्यों नहीं की गई। जांच में हो रही देरी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है और आमजन का भरोसा कमजोर करती है।
सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल
जूली ने आरोप लगाया कि बिना पूरी जांच के बैरवा को पहले पुलिस के हवाले कर दिया गया, जबकि अन्य मामलों में सरकार अलग रवैया अपनाती नजर आती है। उन्होंने कहा कि इस तरह का दोहरा व्यवहार न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि यदि एक दलित इंजीनियर को ही निष्पक्ष न्याय नहीं मिल पा रहा, तो आम लोगों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह स्थिति राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
चुनाव टालने पर सरकार पर तंज
नेता प्रतिपक्ष ने पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनावी हार के डर से चुनाव टाल रही है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने” जैसी स्थिति बनी हुई है। सरकार अपने ही राज्य में चुनाव कराने का साहस नहीं जुटा पा रही, लेकिन बाहरी राज्यों में जश्न मनाने में व्यस्त है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार अपनी प्राथमिकताओं से भटक चुकी है।
युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता
युवाओं के मुद्दे पर जूली ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले सरकारी नौकरियों का वादा किया था, लेकिन अब युवाओं को केवल संविदा आधारित भर्तियां दी जा रही हैं। हाल ही में 3,540 पदों पर निकाली गई भर्ती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें न तो अनुभवी अभ्यर्थियों को वेटेज दिया गया और न ही ओवरएज युवाओं को कोई राहत मिली।
उन्होंने कहा कि शिक्षित युवाओं के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ बंद होना चाहिए और उन्हें स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। संविदा आधारित नौकरियां युवाओं के लिए स्थायी समाधान नहीं हैं।
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर चिंता
जूली ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बांसवाड़ा जिले के घाटोल क्षेत्र के अमरथून स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा के दौरान छत का प्लास्टर गिरने की घटना को बेहद गंभीर बताया।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही का परिणाम है। ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन द्वारा बार-बार भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी देने के बावजूद मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत नहीं किया गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग
अंत में जूली ने राज्य सरकार से मांग की कि वह केवल घोषणाओं और प्रचार तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि दलित उत्पीड़न जैसे गंभीर मामलों में त्वरित और निष्पक्ष न्याय देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है, जिसका असर आने वाले समय में राजनीतिक रूप से भी देखने को मिलेगा।
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