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    पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अलवर दौरा, निजी कार्यक्रम में की शिष्टाचार मुलाकात

    पूर्व उपराष्ट्रपति ने पूर्व विधायक महेंद्र शास्त्री से मुलाकात कर जाना हालचाल, जाट आंदोलन को किया याद

    अलवर। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शनिवार को अपनी धर्मपत्नी के साथ एक दिवसीय निजी दौरे पर अलवर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जाट आंदोलन के पुराने साथियों से मुलाकात की और आंदोलन से जुड़ी यादों को साझा किया। सबसे पहले वे मुंडावर के पूर्व विधायक एवं सहकारिता आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेता महेंद्र शास्त्री के मोती डूंगरी स्थित निवास पहुंचे, जहां उन्होंने उनका कुशलक्षेम जाना और लंबे समय तक विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इसके बाद वे अपने रिश्तेदार के निवास पर भी गए।

    जाट आंदोलन को बताया सामाजिक न्याय की मिसाल

    अलवर सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति ने समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन जाट आंदोलन का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण संघर्ष साबित हुआ। उनके अनुसार आंदोलन के दौरान कहीं भी हिंसा या जान-माल की हानि नहीं हुई।

    उन्होंने बताया कि इस अभियान में महेंद्र शास्त्री, डॉ. हरि सिंह, ज्ञान प्रकाश पिलानिया, राजाराम मील और वे स्वयं सक्रिय रूप से जुड़े रहे तथा पूरे आंदोलन में शांति बनाए रखना प्राथमिक उद्देश्य था। उन्होंने जयपुर के विद्याधर नगर में आयोजित विशाल सभा का भी उल्लेख किया, जिसमें लाखों लोगों की भागीदारी रही।

    आरक्षण से समाज में आया सकारात्मक बदलाव

    जगदीप धनखड़ ने कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का लाभ मिला और बाद में 27 अक्टूबर 1999 को राजस्थान के अधिकांश जाट समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 26 वर्षों में आरक्षण के कारण पिछड़े और किसान समाज के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है तथा शासन-प्रशासन में उनकी भागीदारी बढ़ी है।

    महेंद्र शास्त्री की स्मरण शक्ति की सराहना

    पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि अलवर आने का उनका मन हुआ, इसलिए वे यहां अपने पुराने मित्र महेंद्र शास्त्री से मिलने पहुंचे। उन्होंने शास्त्री की आयु और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद उनकी वाक् क्षमता और स्मरण शक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह वास्तव में प्रेरणादायक है। उन्होंने मुस्कुराते हुए अलवर के प्रसिद्ध कलाकंद का भी जिक्र किया और कहा कि इसकी मिठास लोगों के स्वभाव में भी झलकती है।

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