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    प्रबोधक संघ ने गोगुंदा एसडीएम के खिलाफ की कार्रवाई की मांग, शिक्षकों के हितों के लिए मुखर हुआ संघ

    एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई नहीं तो आंदोलन करेंगे 
    मिशनसच न्यूज,  उदयपुर/जयपुर। अलवर। 
    राजस्थान प्रबोधक संघ (भामस) ने गोगुंदा उपखंड अधिकारी (एसडीएम) शुभम भैंसारे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार पर तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन किया जाएगा। संघ का आरोप है कि एसडीएम द्वारा शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जो शिक्षक समुदाय की गरिमा के खिलाफ है।
    संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए एसडीएम को निलंबित करने की मांग की है। 11 जुलाई को गोगुंदा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ओवराकलां में निरीक्षण के दौरान एसडीएम भैंसारे द्वारा प्रधानाचार्य सुधा शर्मा और अन्य स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार किया गया था। संघ का कहना है कि एसडीएम ने गैर-जिम्मेदाराना ढंग से नोटिस जारी कर शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिससे उनमें आक्रोश व्याप्त है।
    प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन सिंह शेखावत और महामंत्री संजय कौशिक ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही एसडीएम माफी नहीं मांगते हैं और सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती, तो राज्यभर के शिक्षक सड़क पर उतरेंगे।
    गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की मांग
    संघ ने एक बार फिर शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की पुरजोर मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि बीएलओ, पोषाहार वितरण, दूध योजना, ऑनलाइन डेटा फीडिंग जैसे काम शिक्षकों से करवाना शैक्षणिक गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। गणित, अंग्रेज़ी और विज्ञान जैसे विषयों के शिक्षकों की प्रशासनिक कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर भी तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है।
    पौधारोपण लक्ष्य को बताया अव्यवहारिक
    संघ ने शिक्षा मंत्री द्वारा वीसी में दिए गए पौधारोपण लक्ष्य को भी अव्यवहारिक करार दिया है। शिक्षकों के लिए 450 और विद्यार्थियों के लिए 300 पौधों का लक्ष्य तय किया गया है, जिसे संघ ने ज़मीनी हकीकत से परे बताया। शहरी क्षेत्रों में भूमि की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में पौधों की अनुपलब्धता जैसे कारणों का हवाला देते हुए संघ ने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
    निष्कर्ष:
    प्रबोधक संघ की यह मांग केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षक समुदाय की समस्याओं और प्रशासनिक दबावों की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

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