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    बांदीकुई में गांधी पर व्याख्यान, डॉ. जीवन सिंह ने विकास की अवधारणा पर उठाए सवाल

    हमारा समय और महात्मा गांधी विषय पर चर्चा में मानवता, युद्ध और नैतिकता के मुद्दे उठे, सत्य-अहिंसा के विचारों को बताया प्रासंगिक

    बांदीकुई। राजेश पायलट राजकीय महाविद्यालय, बांदीकुई में गांधी जयंती के अवसर पर हमारा समय और महात्मा गांधी विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जीवन सिंह ने महात्मा गांधी के विचारों को वर्तमान समय और मानवता के भविष्य से जोड़ते हुए विकास की मौजूदा अवधारणा पर गंभीर सवाल उठाए।

    मानवता को केंद्र में रखने वाले विचारक थे गांधी

    डॉ. जीवन सिंह ने कहा कि मानवता को केंद्र में रखकर मानव भविष्य की चिंता करने और व्यक्ति स्वराज के लिए संघर्ष करने वाले विरले व्यक्तित्वों में महात्मा गांधी का स्थान विशिष्ट है। गांधी ने विकास के नाम पर स्थापित की जा रही यूरोपीय सभ्यता की अवधारणा पर भी सवाल उठाए थे।

    उन्होंने कहा कि इसी विकास की अवधारणा के साथ दुनिया ने दो विश्व युद्धों सहित लगातार युद्धों का सामना किया। उनके अनुसार, युद्ध केवल विनाश का कारण नहीं बनते, बल्कि कुछ देशों के लिए विकास और आर्थिक गतिविधियों का माध्यम भी बन जाते हैं।

    युद्ध की अर्थव्यवस्था पर भी चर्चा

    डॉ. सिंह ने हथियार बनाने और बेचने वाले देशों तथा हथियार उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भी दुनिया में युद्ध की अर्थव्यवस्था सक्रिय है। उन्होंने कहा कि इसके विरुद्ध सवाल उठाने और बोलने का साहस अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।

    उन्होंने कहा कि ऐसे समय में गांधी के सत्य, अहिंसा, आत्मबल और नैतिकता के विचार और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। गांधी इन मूल्यों को केवल उपदेश के रूप में प्रस्तुत नहीं करते थे, बल्कि अपने जीवन में भी उन्हें नैतिक आग्रह के साथ अपनाते थे।

    मन का स्वराज हासिल करना गांधी की बड़ी उपलब्धि

    डॉ. जीवन सिंह ने कहा कि गांधी ने आधुनिक व्यवस्थाओं के उन पहलुओं पर भी सवाल उठाने में संकोच नहीं किया, जिन्हें वे मानव और समाज के लिए नुकसानदायक मानते थे। उन्होंने कहा कि गांधी के विचारों में व्यक्ति के भीतर के परिवर्तन और ‘मन के स्वराज’ को विशेष महत्व प्राप्त था।

    उन्होंने कहा कि गांधी के भीतर ऐसा नैतिक आग्रह था, जो उन्हें प्रचलित धारणाओं के सामने भी अपने सवाल मजबूती से रखने की शक्ति देता था। आज सभी विकास की बात करते हैं, लेकिन विकास के भीतर छिपे संभावित विनाश को पहचानना और उस पर सवाल उठाना भी जरूरी है।

    विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना

    कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य बजरंग सैनी ने की, जबकि संचालन डॉ. विष्णु शर्मा ने किया। गांधी अध्ययन केंद्र के प्रभारी डॉ. कमलेश, डॉ. अंजना श्रीवास्तव और डॉ. जीसी बैरवा ने कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।

    डॉ. जीवन सिंह ने महाविद्यालय के वातावरण और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति की सराहना की। उन्होंने कहा कि छोटी जगह पर गांधी को इस तरह याद करना अपने आप में अलग अनुभव है। उन्होंने महाविद्यालय की व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय उपस्थिति को उत्साहजनक बताया।

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