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    ब्रज रस उत्सव में कथा का संदेश: क्रोध छोड़ें, क्षमा अपनाएं

    श्रीमद्भागवत कथा में इंद्रेश उपाध्याय ने संयम और शांति का दिया संदेश

    अलवर। ब्रज रस उत्सव के तहत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने श्रद्धालुओं को जीवन में संयम और क्षमा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हो सकता है, लेकिन आत्मिक शांति के लिए कथा श्रवण आवश्यक है।

    इंद्रेश उपाध्याय ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि जो भी व्यक्ति सात दिवसीय कथा में शामिल हो, वह इन सात दिनों तक क्रोध का त्याग करे और क्षमा का भाव बनाए रखे। उन्होंने कहा कि कथा का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब व्यक्ति शांत मन और मौन भाव से कथा श्रवण करता है।

    अलवर में ब्रज रस उत्सव के अंतर्गत आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन प्रतिदिन शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन में देशभर से संत-महात्मा एवं कथावाचक भाग ले रहे हैं, वहीं विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।

    धार्मिक वातावरण में श्रद्धालु भक्ति भाव से कथा का आनंद लेते हुए आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं।

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