चातुर्मासिक सत्संग में बोले आचार्य रामदयालजी महाराज—संसार नहीं, संसार बनाने वाले परमात्मा की ओर लगाएं ध्यान
भीलवाड़ा। माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में चल रहे ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के अंतर्गत मंगलवार को दैनिक सत्संग का आयोजन हुआ। अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने श्रद्धालुओं को परमात्मा की भक्ति, अटूट विश्वास और प्रीत का महत्व समझाया।
आचार्यश्री ने कहा कि संसार की ओर ध्यान देने के बजाय संसार बनाने वाले परमात्मा की ओर ध्यान देना चाहिए। यदि मन परमात्मा की ओर लग जाए तो वह सदैव अपने भक्त का ध्यान रखता है। परमात्मा को भक्त से किसी वस्तु की अपेक्षा नहीं, केवल सच्ची भक्ति चाहिए।
उन्होंने कहा कि भक्त के जीवन में भी अनेक संकट आते हैं, लेकिन परमात्मा के प्रति असीम श्रद्धा और भक्ति होने के कारण वह संकटों से सुरक्षित निकल जाता है। भक्त के मन में जैसी भावना होती है, उसे उसी के अनुरूप फल की प्राप्ति होती है। इसलिए परमात्मा के प्रति विश्वास हमेशा अटल और अडिग होना चाहिए।
परमात्मा से संबंध जानने वाला बन जाता है भक्त
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा के साथ अपने संबंधों को जान लेता है, वही सच्चा भक्त बन जाता है। परमात्मा से प्रीत करने के लिए मन में करुणा का भाव होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जैसा है, वैसा ही रहे, लेकिन परमात्मा के प्रति उसकी प्रीत में कभी कमी नहीं आनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रीत उसी से होती है जिसे हम जानते हैं। महापुरुषों और भक्तों ने परमात्मा को जाना, इसलिए उससे प्रीत की और अपने जीवन में इतिहास रच दिया। प्रीत के बिना परमात्मा का साक्षात्कार संभव नहीं है।
भक्ति से जीवन में आता है आनंद
आचार्यश्री ने कहा कि परमात्मा निराकार भी है और साकार भी, इसलिए इस विषय में अनावश्यक तर्क करने की आवश्यकता नहीं है। जीवन में सभी प्रकार की सुविधाएं होने के बावजूद यदि भक्ति नहीं है तो जीवन नीरस हो जाता है। जिस प्रकार भोजन का स्वाद नमक से आता है, उसी प्रकार जीवन का आनंद भक्ति से आता है।
उन्होंने कहा कि परमात्मा का कोई एक नाम नहीं हो सकता। वाणीजी में भी परमात्मा को अनेक नामों से पुकारा गया है। सुख का अभाव और दुख का प्रभाव भी व्यक्ति को परमात्मा की भक्ति की ओर प्रेरित करता है। परमात्मा अपने भक्त से एक क्षण के लिए भी दूर नहीं रहता और उसकी कृपा सदैव भक्त पर बनी रहती है।
आचार्यश्री ने कहा कि अपने पैरों को भगवान की भक्ति के लिए चलाना और अपने नेत्रों से संसार के रचयिता के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करना ही सच्ची भक्ति है।
संत मनोरथरामजी ने किया मानस प्रवचन
दैनिक सत्संग में आचार्य रामदयालजी महाराज के प्रवचन से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। इस दौरान कुछ श्रद्धालुओं ने भजन प्रस्तुत किए।
प्रवचन के विश्राम के बाद श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चातुर्मास में प्रतिदिन हो रहे धार्मिक आयोजन
माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक निर्धारित है। इससे पहले सुबह 8:30 से 9 बजे तक रामधुनी के साथ वाणीजी का पाठ किया जा रहा है।
सूर्यास्त के समय संध्या आरती तथा रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल कथा का आयोजन भी हो रहा है। इन धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर संतों के प्रवचन और भक्ति कार्यक्रमों का लाभ ले रहे हैं।
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