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    मंडियों में मूंग की आवक शुरू, एमएसपी खरीद का इंतजार; किसानों को प्रति क्विंटल 1280 से 3200 रुपए तक घाटे का दावा

    सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से मूंग उत्पादकों की बढ़ी चिंता, मंडियों में 5500 से 7500 रुपए तक मिल रहे भाव

    जयपुर। प्रदेश की मंडियों में मूंग की नई फसल की आवक शुरू हो गई है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। किसान पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि मंडियों में मूंग के कम भाव मिलने के कारण उत्पादक किसानों को प्रति क्विंटल 1280 से 3200 रुपए तक का घाटा उठाना पड़ रहा है।

    किसान पक्ष के अनुसार अब तक करीब 45 हजार क्विंटल मूंग किशनगढ़, केकड़ी और मेड़ता की मंडियों में पहुंच चुका है। दावा है कि यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी भाव के अंतर को आधार बनाया जाए तो किसानों को अब तक करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है।

    8780 रुपए एमएसपी, मंडियों में 5500 से 7500 तक भाव

    सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8780 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है। किसान पक्ष का कहना है कि इसके मुकाबले मंडियों में मूंग के भाव करीब 5500 से 7500 रुपए प्रति क्विंटल तक ही मिल रहे हैं।

    इस आधार पर किसानों को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य की तुलना में प्रति क्विंटल 1280 से 3280 रुपए तक कम कीमत मिलने की बात कही गई है। किसान पक्ष ने इसी अंतर को किसानों के नुकसान का आधार बताते हुए सरकार से जल्द एमएसपी पर खरीद शुरू करने की मांग की है।

    दिए गए आंकड़ों के अनुसार 45 हजार क्विंटल की आवक पर 1280 से 3200 रुपए प्रति क्विंटल के अंतर को देखें तो अब तक करीब 5.76 करोड़ से 14.40 करोड़ रुपए तक के नुकसान का अनुमान बनता है। हालांकि वास्तविक नुकसान मंडी में बिके मूंग की मात्रा और प्रत्येक किसान को मिले भाव के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

    1 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग

    किसान पक्ष का कहना है कि पिछले कई वर्षों से मूंग की सरकारी खरीद 1 सितंबर से शुरू करने की मांग की जाती रही है। इस संबंध में राज्य और केंद्र सरकार को कई बार ज्ञापन दिए गए तथा सरकार के साथ हुई वार्ताओं में भी खरीद जल्द शुरू करने का आग्रह किया गया।

    किसानों का तर्क है कि फसल मंडियों में पहुंचने के शुरुआती दौर में ही यदि एमएसपी पर खरीद व्यवस्था उपलब्ध नहीं रहती है तो उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ सकती है।

    नेफेड की बिक्री नीति पर भी सवाल

    किसान पक्ष ने नेफेड की ओर से पिछले वर्षों के भंडारित मूंग की बिक्री को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुराने मूंग का भंडार करीब 6500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचा जा रहा है, जो घोषित एमएसपी से 2280 रुपए कम है।

    किसान पक्ष का आरोप है कि कम कीमत पर पुराने स्टॉक की बिक्री का असर बाजार भाव पर पड़ रहा है और इससे नई फसल उत्पादित करने वाले किसानों को भी नुकसान हो रहा है। किसानों ने सरकार से इस व्यवस्था पर भी पुनर्विचार करने की मांग की है।

    भावांतर भुगतान योजना का लाभ देने की मांग

    किसानों का कहना है कि सरकार ने मंडियों में एमएसपी से कम भाव मिलने की स्थिति में किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए भावांतर भुगतान योजना का प्रावधान किया हुआ है। ऐसे में सरकार के पास किसानों को राहत देने के लिए सरकारी खरीद और भावांतर भुगतान जैसे विकल्प मौजूद हैं।

    किसान पक्ष का कहना है कि इसके बावजूद उत्पादकों को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित रहना पड़ रहा है। केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार होने के बावजूद मूंग उत्पादकों को एमएसपी का लाभ नहीं मिलना चिंता का विषय बताया गया है।

    खरीद की गारंटी के कानून की मांग पुरानी

    किसान पक्ष ने कहा कि वर्ष 2010 से देश के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुनिश्चित प्राप्ति के लिए खरीद की गारंटी का कानून बनाने की मांग को लेकर आंदोलन करते रहे हैं।

    किसानों का कहना है कि केवल एमएसपी घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है। किसानों को उनकी उपज का घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य वास्तव में मिले, इसके लिए प्रभावी खरीद व्यवस्था और कानूनी गारंटी जरूरी है। मूंग की मंडियों में शुरू हुई आवक के बीच अब किसानों की नजर सरकार की ओर से एमएसपी खरीद शुरू करने की घोषणा पर है।

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