कठूमर में मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर ग्रामीणों को दी कानूनी जानकारी
कठूमर। मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) योजना 2025 के अंतर्गत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मन्या का बास, कठूमर में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर माननीय राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलवर के निर्देशानुसार आयोजित हुआ।
शिविर की शुरुआत नालसा थीम सॉन्ग “एक मुठ्ठी आसमां” के साथ की गई। पीएलवी दीपक कुमार ने मानव और वन्यजीव संघर्ष से संबंधित कानूनी प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसके समाधान के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कड़े नियम बनाए गए हैं।
विद्यालय की प्रधानाचार्य सविता बाई मीना ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत जंगली जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है तथा बाघ और हाथी जैसे संरक्षित वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध माना जाता है। उन्होंने धारा 11 एवं धारा 39 के प्रावधानों की भी जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी जंगली जानवर को मारने का अधिकार आम नागरिक को नहीं है, सिवाय आत्मरक्षा की विशेष परिस्थितियों के।
शिविर में ग्रामीणों और विद्यार्थियों को वन्यजीवों से होने वाले नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे की जानकारी भी दी गई। जनहानि, स्थायी विकलांगता, फसल नुकसान एवं पशुधन हानि की स्थिति में सरकार द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के प्रावधान समझाए गए।
पीएलवी दीपक कुमार ने ग्रामीणों को सलाह दी कि वन्यजीवों के साथ छेड़छाड़ न करें तथा वन विभाग द्वारा निर्धारित बफर जोन का सम्मान करें। उन्होंने बताया कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में तुरंत वन विभाग या हेल्पलाइन 1926 पर सूचना देना जरूरी है।
कार्यक्रम में अशोक कुमार मीना, मुकुट बिहारी मीना, सुरेंद्र सिंह, सूर्यकांत कौशिक सहित विद्यालय स्टाफ एवं ग्रामीण मौजूद रहे। शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलवर के संपर्क नंबर 0144-2940098 एवं मोबाइल नंबर 8306002102 की जानकारी भी साझा की गई।
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