रोजगार और प्राकृतिक चिकित्सा पर उठाए सवाल, कहा- प्रशिक्षित योग शिक्षकों को हटाना अन्यायपूर्ण फैसला
अलवर। नेता प्रतिपक्ष एवं अलवर ग्रामीण विधायक टीकाराम जूली ने योग शिक्षकों को हटाने के फैसले को लेकर राज्य सरकार विरोधाभासी संदेश दे रही है। उन्होंने कहा कि एक ओर पूरे देश में प्राकृतिक चिकित्सा और योग को बढ़ावा देने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा योग शिक्षकों को हटाने का फरमान जारी किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

जूली ने कहा कि 21 जून को विश्व योग दिवस पर बड़े-बड़े विज्ञापन देकर योग को बढ़ावा देने का दावा करने वाली सरकार अब ऐसे फैसले लेकर उल्टा संदेश दे रही है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सरकार जनता और युवाओं को क्या संदेश देना चाहती है।
उन्होंने कहा कि एनएचएम (एलोपैथिक विभाग) के अंतर्गत पिछले 7-8 वर्षों से सेवाएं दे रहे प्रशिक्षित योग शिक्षकों को हटाना न्यायोचित नहीं है। यह फैसला न केवल उनके रोजगार पर चोट है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ भी खिलवाड़ है।
टीकाराम जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग अभियान का प्रचार करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ योग जैसी वैज्ञानिक और विशेष विधा को बिना प्रशिक्षित लोगों के भरोसे छोड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो सरकार स्वयं प्रधानमंत्री के अभियानों को कमजोर करने में जुटी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत यह है कि पहले से कार्यरत युवाओं को ही बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। जूली ने कहा कि हर साल रोजगार देने का दावा करने वाली सरकार अब रोजगार पर लगे युवाओं को घर बैठाने की तैयारी कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि सरकार तत्काल इस फैसले पर पुनर्विचार करे और वर्षों से सेवाएं दे रहे प्रशिक्षित योग शिक्षकों को हटाने का निर्णय वापस ले। उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण माध्यम है और इसे मजबूत करने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की भूमिका बेहद जरूरी है।
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