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    स्कूल पर महिला कर्मियों को धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप

    जबलपुर। मध्य प्रदेश में जबरन और प्रलोभन देकर कराया जाने वाला धर्म परिवर्तन एक गंभीर अपराध है। इसके बावजूद चोरी-छिपे इस तरह की गतिविधियों के मामले सामने आते रहते हैं, जिन पर प्रशासन सख्त रुख अपनाता है। ऐसा ही एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला जबलपुर से सामने आया है, जहाँ एक प्रतिष्ठित मिशनरी स्कूल के प्रबंधन पर अपने कर्मचारियों का जबरिया धर्मांतरण कराने के प्रयास के आरोप लगे हैं। पीड़ित महिलाओं की लिखित शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है।

    "स्कूल में नौकरी करनी है तो अपनाना होगा ईसाई धर्म"

    यह पूरा विवाद जबलपुर के माढ़ोताल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेंट एलायसिस स्कूल (रिमझा) से जुड़ा है। पीड़ित महिला सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि स्कूल के वर्तमान फादर ने उन्हें बुलाकर सीधे शब्दों में धमकी दी कि यदि उन्हें संस्था में अपनी नौकरी बचानी है, तो हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाना होगा, अन्यथा वे काम पर न आएं। महिलाओं ने अपनी दयनीय पारिवारिक और आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए काफी मिन्नतें कीं, लेकिन आरोप है कि प्रबंधन ने उनकी एक न सुनी और उन्हें जबरन नौकरी से बर्खास्त कर दिया।

    न्याय की गुहार लेकर एएसपी के पास पहुंचीं पीड़ित महिलाएं

    अचानक रोजगार छिन जाने से परेशान महिला कर्मियों ने शुरुआत में स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। वहाँ से तुरंत राहत न मिलने पर उन्होंने एडिशनल एसपी (ASP) से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस महकमा तुरंत हरकत में आया।

    इस बीच, पीड़ित महिलाओं के समर्थन में 'हिंदू धर्मसेना' के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी आगे आ गए हैं। संगठन ने जिला प्रशासन को खुले तौर पर चेतावनी दी है कि यदि इस घिनौने कृत्य में शामिल आरोपी फादर के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे स्कूल परिसर के सामने उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

    नए फादर के आते ही बदला रवैया, चर्च आने का बनाया दबाव

    शिकायतकर्ता दीपा पटेल (निवासी शारदा विहार, मदर टेरेसा नगर) ने बताया कि वह साल 2024 से सेंट एलायसिस स्कूल में बतौर सफाईकर्मी अपनी सेवाएं दे रही है। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। उन्हें पूर्व में तैनात फादर वाल्टर ने काम पर रखा था, जिनका अब स्थानांतरण हो चुका है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब हाल ही में फादर सोमी जैकब ने स्कूल की कमान संभाली। आरोप है कि पदभार ग्रहण करने के कुछ ही दिनों बाद फादर ने महिला कर्मचारियों को अपने केबिन में तलब किया और उन पर नियमित रूप से चर्च आने का दबाव बनाया। डर के मारे कुछ कर्मचारियों ने हामी भर दी, लेकिन दीपा ने ऐसा करने से स्पष्ट मना कर दिया।

    फोन पर बात करने का बहाना बनाकर निकाला बाहर

    पीड़ित महिला के अनुसार, गुरुवार को जब वह स्कूल परिसर में ड्यूटी पर थी, तब घर से आए एक जरूरी फोन पर बात करने के कारण वहां तैनात एक अन्य ईसाई महिला कर्मचारी ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। जब इस दुर्व्यवहार की शिकायत लेकर दीपा वर्तमान फादर सोमी जैकब के पास पहुंची, तो न्याय मिलने के बजाय उल्टा उसी पर दबाव डाला गया। आरोप है कि फादर ने दो टूक कहा कि स्कूल के भीतर बने रहना है तो धर्म परिवर्तन की शर्त माननी ही होगी। जब दीपा अपने धर्म पर अडिग रही, तो उसे तत्काल प्रभाव से काम से बेदखल कर दिया गया।

    कई अन्य महिलाएं भी हैं पीड़ित, पुलिस ने माढ़ोताल थाना प्रभारी को सौंपी जांच

    हिंदू धर्मसेना के प्रदेश अध्यक्ष नीरज राजपूत ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल दीपा का मामला नहीं है, बल्कि शहर के कई अन्य मिशनरी संस्थानों में भी रोजगार देने की आड़ में इस तरह का खेल खेला जा रहा है। कई अन्य महिलाएं भी इस मानसिक प्रताड़ना का शिकार हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम पर जबलपुर के एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि पुलिस को सेंट एलायसिस स्कूल रिमझा के खिलाफ धर्मांतरण के दबाव और बात न मानने पर नौकरी से निकालने संबंधी एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे बेहद गंभीरता से लिया गया है। एएसपी ने स्पष्ट किया कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की जिम्मेदारी माढ़ोताल थाना प्रभारी को सौंप दी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के मुताबिक सख्त दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।

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