केमिस्ट हितों की रक्षा हेतु सरकार का सकारात्मक निर्णय, ड्रग लाइसेंस प्रक्रिया पूर्ववत जारी रखने का आश्वासन
मिशनसच न्यूज, जयपुर। राजस्थान केमिस्ट एलायंस के निरंतर संघर्ष, संगठित प्रयासों और प्रभावी संवाद का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। ड्रग लाइसेंस हेतु केवल कॉमर्शियल परिसर (Commercial Premise) की अनिवार्यता को लेकर प्रदेशभर के केमिस्टों में व्याप्त चिंता को संगठन ने गंभीरता से उठाया और सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा। इसके फलस्वरूप राज्य सरकार एवं ड्रग विभाग ने मेडिकल स्टोर के नए ड्रग लाइसेंस तथा पुराने लाइसेंसों के नवीनीकरण की प्रक्रिया को पूर्ववत जारी रखने का आश्वासन दिया है। यह निर्णय प्रदेश के हजारों केमिस्टों के लिए बड़ी राहत के रूप में सामने आया है।
राजस्थान केमिस्ट एलायंस अलवर जिला सचिव सुरेश कुकरेजा ने बताया राजस्थान राज्य के प्रत्येक केमिस्ट से जुड़े रहने और हर परिस्थिति में उनकी आवाज़ बनने का संकल्प लेकर कार्य कर रहे राजस्थान केमिस्ट एलायंस ने एक बार फिर साबित किया है कि संगठित प्रयासों से नीतिगत स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद गुप्ता एवं प्रदेश सचिव धनपत सेठिया के सशक्त, दूरदर्शी और कर्मठ नेतृत्व में प्रदेशभर से लगभग 60 पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य भवन, जयपुर पहुँचा। इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न जिलों के अध्यक्ष, सचिव एवं पदाधिकारी सम्मिलित रहे। जयपुर से शैलेन्द्र भार्गव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से गंभीर और सार्थक वार्ता की। बैठक में आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला, अतिरिक्त आयुक्त भगवत सिंह, ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक तथा अतिरिक्त औषधि नियंत्रक मनोज धीर उपस्थित रहे। वार्ता के दौरान केमिस्टों से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें प्रमुख रूप से ड्रग लाइसेंस के लिए केवल कॉमर्शियल प्रिमाइज़ की बाध्यता का विषय शामिल रहा।
संगठन द्वारा बताया गया कि प्रदेश के अनेक छोटे कस्बों, ग्रामीण क्षेत्रों एवं पुरानी बाजार संरचनाओं में वर्षों से संचालित मेडिकल स्टोर आवासीय या मिश्रित परिसरों में स्थापित हैं। ऐसे में अचानक कॉमर्शियल परिसर की अनिवार्यता लागू होने से हजारों केमिस्टों का व्यवसाय संकट में पड़ सकता था और जनसामान्य को आवश्यक दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती थी। इन व्यावहारिक कठिनाइयों, जनहित और दवा व्यापार को आवश्यक सेवा मानते हुए संगठन ने अपना पक्ष मजबूती से रखा।
ड्रग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने केमिस्टों की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। अधिकारियों द्वारा यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि मेडिकल स्टोर के नए ड्रग लाइसेंस एवं पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी। इससे कॉमर्शियल परिसर की अनिवार्यता को लेकर बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है और प्रदेशभर के केमिस्टों में राहत का वातावरण बना है।
बैठक में अधिकारियों द्वारा यह भी निर्देश दिए गए कि नारकोटिक्स एवं नशे की श्रेणी की दवाओं का क्रय-विक्रय पूर्णतः नियमानुसार किया जाए। साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं का विक्रय केवल उचित, आवश्यक एवं वैध चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसमें केमिस्टों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
इसके अतिरिक्त प्रतिनिधियों को NDLS (National Drugs Licensing System) की विस्तृत जानकारी दी गई। यह प्रणाली भविष्य में “वन नेशन – वन पोर्टल” के रूप में लागू की जाएगी, जिससे ड्रग लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को देशभर में एकीकृत और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई शंकाओं और तकनीकी समस्याओं पर चर्चा कर समाधान किया गया तथा शेष बिंदुओं पर शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया गया।
राजस्थान केमिस्ट एलायंस ने इसे केमिस्ट हितों, जनस्वास्थ्य और दवा व्यापार को आवश्यक सेवा के रूप में मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया है। संगठन ने राज्य सरकार, माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं ड्रग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है कि उन्होंने केमिस्टों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए जनहित एवं व्यापार-हितैषी निर्णय लिया।
संकल्प को दोहराते हुए संगठन ने कहा—
🛡️ सबका साथ, सबका विकास
🤝 अपना व्यापार — अपनों के साथ
राजस्थान केमिस्ट एलायंस ने स्पष्ट किया कि वह प्रदेश के प्रत्येक केमिस्ट के हितों की रक्षा के लिए निरंतर सक्रिय रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर हर स्तर पर संघर्ष जारी रखा जाएगा।
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