रंगकर्मियों और सांस्कृतिक संगठनों ने मुख्यमंत्री से नीलगाय वन्यजीव संरक्षण हेतु कानून समाप्त करने की अपील की
अलवर। राजस्थान के कलाकारों, रंगकर्मियों, सांस्कृतिक कर्मियों और संवेदनशील नागरिकों की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक भावपूर्ण पत्र भेजकर नीलगाय हत्या संबंधी कानून को रद्द करने की मांग की गई है। पत्र में वन्यजीव संरक्षण और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए नीलगायों को जीवन का अधिकार देने की अपील की गई है।
इस संबंध में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने मुख्यमंत्री कार्यालय को रजिस्टर्ड स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजा। पत्र में कहा गया कि प्रदेश में सभी वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पहले से कानून बने हुए हैं, ऐसे में किसानों की फसल सुरक्षा के नाम पर नीलगायों की हत्या की अनुमति देना उचित नहीं है।
पत्र में उल्लेख किया गया कि नीलगाय हत्या कानून बनने के बाद किसानों द्वारा फसल सुरक्षा के लिए इसका उपयोग कम हुआ है, जबकि कथित रूप से शिकारी और मांस तस्कर इस कानून की आड़ में बड़ी संख्या में नीलगायों का शिकार कर उनके मांस का अवैध व्यापार कर रहे हैं। इसमें कहा गया कि यह कानून अब किसानों की बजाय “मीट माफियाओं” के लिए साधन बनता जा रहा है।
पत्र में यह भी कहा गया कि अन्य वन्यजीवों की तरह नीलगायों को भी जीने का संवैधानिक और प्राकृतिक अधिकार प्राप्त है तथा उन्हें इस अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि वे इस मामले में संवेदनशील पहल करते हुए नीलगाय हत्या से जुड़े प्रावधानों को समाप्त करें।
जगदीश शर्मा ने बताया कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों तथा राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को भी पत्र की प्रतियां भेजी जाएंगी, ताकि इस विषय में हस्तक्षेप कर वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
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