पाठ्यक्रम विवाद के बीच बयानबाजी तेज, मुख्यमंत्री से माफी और कार्रवाई की मांग
जयपुर। राजस्थान में स्कूली पाठ्यक्रम से इतिहास की पुस्तकों को हटाए जाने के फैसले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
टीकाराम जूली ने कहा कि भाजपा सरकार का यह कदम प्रदेश के शौर्य और बलिदान के इतिहास का अपमान है और इससे सरकार का “चाल, चरित्र और चेहरा” सामने आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों और गौरवशाली विरासत से दूर करने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती साहस, त्याग और वीरता की अमर गाथाओं से भरी हुई है, लेकिन सरकार इस गौरवशाली इतिहास को पाठ्यपुस्तकों से हटाकर प्रदेश की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है। जूली ने आरोप लगाया कि पहले भी कई ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अध्यायों को हटाया या गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने इसे “इतिहास मिटाकर पहचान को कुचलने की साजिश” बताते हुए कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार लगातार प्रदेश के इतिहास पर प्रहार कर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों को बदलने से वास्तविकता नहीं बदली जा सकती और जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी।
इस मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से प्रदेश की जनता से माफी मांगने की मांग की है। साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की भी मांग करते हुए कहा कि इस तरह के फैसले प्रदेशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।
टीकाराम जूली ने चेतावनी देते हुए कहा कि राजस्थान की जनता अपने गौरवशाली अतीत के साथ हो रहे इस कथित खिलवाड़ को कभी नहीं भूलेगी और समय आने पर इसका जवाब देगी।
फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले समय में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।
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