योग सत्र में मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित अभ्यास पर जोर, योगाचार्य ने बताए विभिन्न आयाम
लक्ष्मणगढ़। श्री गोविंद देव परोपकारी ट्रस्ट के तत्वावधान में मंगलवार को तहसील क्षेत्र के फतेहपुर स्थित योगीता पब्लिक स्कूल में योग सत्र का आयोजन किया गया। पतंजलि योगपीठ के योगाचार्य केदार नाथ शर्मा ने विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को योगाभ्यास कराया तथा योग के विभिन्न आयामों और जीवन में इसके महत्व की जानकारी दी।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमर सिंह मीना ने बताया कि योग सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया। योगाचार्य ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से योगाभ्यास करने के लिए प्रेरित किया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
योग को बताया जीवन दर्शन और जीवन पद्धति
योगाचार्य केदार नाथ शर्मा ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन दर्शन और आत्मानुशासन है। योग ऐसी जीवन पद्धति है, जिसके माध्यम से व्यक्ति स्वस्थ और संतुलित जीवन की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि योग आत्मोपचार एवं आत्मदर्शन की श्रेष्ठ आध्यात्मिक विद्या है। यह व्यक्ति को स्वयं के भीतर झांकने और अपने व्यक्तित्व को सकारात्मक रूप से विकसित करने का अवसर देता है।
योगाचार्य ने कहा कि योग व्यक्ति को सीमित सोच और क्षमताओं से ऊपर उठकर स्वयं को समग्र रूप से रूपांतरित एवं विकसित करने की प्रेरणा देता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी योग
केदार नाथ शर्मा ने कहा कि योग को केवल वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में सहायता करता है तथा शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि योग का उद्देश्य केवल लक्षणों को दूर करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को भीतर से स्वस्थ और संतुलित बनाना है। योग को केवल व्यायाम अथवा किसी विशेष वर्ग की पूजा-पद्धति मानना इसके व्यापक स्वरूप को सीमित करना है।
उन्होंने विद्यार्थियों से स्वार्थ, आग्रह, अज्ञान और अहंकार से ऊपर उठकर योग को समग्र विज्ञान के रूप में समझने तथा इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
त्रिगुणों और वैज्ञानिक अवधारणाओं का उदाहरण देकर समझाया
योग सत्र के दौरान योगाचार्य ने सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण की अवधारणाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को विषय को अलग दृष्टिकोण से समझाने के लिए इन अवधारणाओं का इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं से संबंध बताते हुए उदाहरण प्रस्तुत किए।
उन्होंने योग की पौराणिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि योगाभ्यास और प्राणायाम के निरंतर अभ्यास से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आने की मान्यता है। उन्होंने अष्ट चक्रों के जागरण तथा संचित अशुभ संस्कारों के क्षीण होने से जुड़ी योग की पारंपरिक मान्यताओं की भी जानकारी दी।
विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साह से किया योगाभ्यास
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास में हिस्सा लिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को योग के प्रति जागरूक करना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली के लिए नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित करना रहा।
इस अवसर पर विद्यालय निदेशक मुजेश शर्मा सहित लालचंद, श्याम सुंदर, दिनेश, पूजा, लक्ष्मी, राजवती, आंचल सहित अन्य शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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