मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोले – भगवान ऋषभदेव इस धरती के प्रथम राजा थे
जयपुर। शाश्वत महातीर्थ अयोध्या स्थित श्री ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज परिसर में जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ का भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 17 से 21 जून तक श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव का आयोजन परम पूज्य आचार्य श्री भद्रबाहू सागर महाराज ससंघ, भारत गौरव गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ, प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका रत्न श्री चन्दनामती माताजी तथा तीर्थ के पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के सान्निध्य में हुआ।
अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मंत्री विजय कुमार जैन ने बताया कि 17 जून को ध्वजारोहण, घटयात्रा, मंडप उद्घाटन एवं मुख्य वेदी पर मंगल कलश स्थापना के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ। गर्भकल्याणक के अवसर पर माता की गोद भराई तथा सौधर्म इन्द्र की सभा का आकर्षक मंचन किया गया।
18 जून को जन्मकल्याणक के तहत भव्य शोभायात्रा अयोध्या के प्रमुख मार्गों से निकाली गई। रायगंज मंदिर पहुंचने पर पाण्डुकशिला पर भगवान का जन्माभिषेक संपन्न हुआ। शाम को पालना एवं बालक्रीड़ा महोत्सव आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया तीर्थ का दौरा
19 जून को तपकल्याणक के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने तीर्थ परिसर में नवनिर्मित भव्य द्वार और भगवान ऋषभदेव के 101 पुत्र सिद्ध परमेष्ठियों के जिनमंदिर का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने मंदिर में दर्शन कर गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा तीर्थ विकास पर चर्चा की।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान ऋषभदेव इस धरती के प्रथम राजा थे तथा उनके पुत्र भरत के नाम पर देश का नाम भारत पड़ा। उन्होंने कहा कि अयोध्या अनेक तीर्थंकरों की जन्मस्थली होने के कारण अत्यंत पावन और गौरवशाली भूमि है। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा संस्कृति एवं धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया।
ज्ञानमती माताजी ने बताया जैन इतिहास का महत्व
गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान ऋषभदेव ने मानव समाज को जीवन जीने की कला सिखाई तथा नारी शिक्षा का प्रथम सूत्रपात किया। उन्होंने कहा कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ के पंचकल्याणक का आयोजन जैन इतिहास को जीवंत करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की।
केवलज्ञान एवं मोक्षकल्याणक की हुई भव्य क्रियाएं
20 जून को भगवान मुनिसुव्रतनाथ के प्रथम आहार का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद केवलज्ञान कल्याणक की क्रियाएं संपन्न हुईं तथा समवसरण की भव्य रचना की गई। आचार्य श्री भद्रबाहू सागर महाराज एवं गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी के सान्निध्य में दिव्यध्वनि कार्यक्रम आयोजित हुआ।
21 जून को मोक्षकल्याणक के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन हुआ। सम्मेदशिखर का प्रतीक पर्वत बनाकर मोक्षकल्याणक की क्रियाएं संपन्न कराई गईं। भगवान का मस्तकाभिषेक, निर्वाण लाडू समर्पण, नवीन जिनमंदिरों में प्रतिमा विराजमान एवं कलशारोहण के साथ पूर्णाहुति दी गई।
कार्यक्रम के अंत में दिगम्बर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री अमरचंद जैन सर्राफ ने देशभर से आए श्रद्धालुओं, अतिथियों, पात्रों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन, जम्बूद्वीप हस्तिनापुर ने किया।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


