सुख चाहिए तो अपना सर्वस्व परमात्मा के चरणों में समर्पित कर दे
भीलवाड़ा। सारे वेदों का सार पढ़ लिया पर संतोष का पाठ नहीं पढ़ा तो सब फीका है। स्वामी रामचरण जी महाराज ने संतोष धन को तीन लोक में सबसे बड़ा धन बड़ा बताया है। जीवन में तीन बातों पर हमेशा संतोष रखे, भोजन जैसा भी मिले उसे परमात्मा को भोग लगा प्रसाद के रूप ग्रहण कर ले, पत्नी को भी परमात्मा का प्रसाद माने ओर संपति जो प्राप्त हुई है वह पर्याप्त है। ये सोच जिसकी हो गई वह तीन लोक में सबसे सुखी प्राणी है।
ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने शनिवार को ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दुःख का मूल कारण जो प्राप्त है उससे प्रसन्न नहीं रहना ओर जो अप्राप्त है उसके लिए लालायित रहना। सुख चाहिए तो अपना सर्वस्व परमात्मा के चरणों में समर्पित कर दे। जिसने ऐसा किया उसका सुयश परमात्मा ने संसार में अखण्ड बना दिया। सुखी होना है तो स्वामी बनने का सपना नहीं देखे दासत्व भाव अखण्ड बना कर रखे।
आचार्यश्री ने कहा कि वर्तमान में पूजा अर्चना का माह श्रावण चल रहा है। सब कुछ परमात्मा को समर्पित करने पर अलौकिक परमात्मा की प्राप्ति होती है। गोपियों ने सर्वस्व समर्पित किया तो भगवान ने उनका नाम तीनों लोको में अमर कर दिया। जो भक्त सर्वस्व अर्पित करते है भगवान उनके लिए न्यौछावर हो जाते है। हमारे पास जो कुछ भी है उसे परमात्मा को अर्पित करना ही नवधा भक्ति मानी जाती है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि जिस पर परमात्मा की कृपा होती है वहीं उनके द्वार पर जा सकता है। ऐसी कृपा पाने के लिए समर्पित भाव होना जरूरी है। राजस्थान व मेवाड़ की धरती मीरा की भक्ति, प्रताप की वीरता एवं भामाशाह की दानवृति से पहचानी जानती है। भामाशाह जैसे दानी ने अद्भुत इतिहास रच दिया।अपने पास मात्र लोठा,लंगोटा ओर सोटा रखा बाकी जो भी था उसे देश के लिए समर्पित कर दिया, भामाशाह का नाम दानवृति के लिए अमर हो गया
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस पर प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस जी ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
भीलवाड़ा एवं रामस्नेही संप्रदाय में पहली बार सामूहिक 108 वाणीजी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ 13 सितम्बर से 29 सितम्बर तक
स्वामी रामचरणजी महाराज की पावन तपोस्थली पर उनकी कृपा से विश्व शांति चातुर्मास समिति द्वारा विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से चातुर्मास के दौरान भीलवाड़ा में पहली बार 13 से 19 सितम्बर तक आचार्य रामदयालजी महाराज के सानिध्य में सामूहिक 108 वाणीजी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ का एतिहासिक विराट आयोजन होगा। इसमें 108 वाणी पाठक क्रमशः प्रातः काल से सायं काल तक वाणी पाठ करेंगे। ये सभी पाठक रामस्नेही पुरुष भक्त , श्रद्धालु होंगे जो भीलवाड़ा सहित देश के विभिन्न स्थानों से आ कर पाठ में अपनी सहभागिता रखेंगे ।
इस अवधि में प्रतिदिन प्रातः 8 से 11 बजे तक आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से वाणीजी के प्रवचन होंगे। साथ ही दोपहर में 2 से 5 बजे तक संत श्री मनोरथ राम जी राम मचलाना द्वारा श्रीमद् भागवत कथा श्रवण कराई जाएगी। इस विराट आयोजन के लिए देश, विदेश के रामस्नेही भक्तजनों में उत्साह और उमंग का माहौल है
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


