सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के विचरण में नहीं होगी परेशानी, विस्थापन प्रक्रिया में ग्रामीणों की रुचि से आई तेजी
अलवर मिशन सच न्यूज़ | सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के बावजूद अब उनके स्वच्छ विचरण में कोई बाधा नहीं आएगी। वजह यह है कि वर्षों से अटकी पड़ी विस्थापन प्रक्रिया में ग्रामीणों ने अब रुचि दिखानी शुरू कर दी है। राज्य सरकार की ओर से पुनः सर्वे कराकर नई पीढ़ी को पैकेज में शामिल करने के फैसले से यह प्रक्रिया तेज हुई है।
11 में से 5 गांव पूरी तरह विस्थापित
सरिस्का टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में कुल 11 गांव बसे हुए थे, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से बाहर बसाने की योजना है। इनमें से उमरी, भगानी, पानीढाल, रोटक्याला और डाबली गांव पहले ही पूरी तरह विस्थापित हो चुके हैं। वहीं, शेष 6 गांवों में विस्थापन की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई थी। अब सरकार के नए फैसले से इसमें तेजी आई है।
सुकोला का सर्वे पूरा, क्रास्का का जल्द होगा शुरू
डीएफओ (विस्थापन) जगदीश दैया ने बताया कि ग्रामीणों की मांग पर नए सिरे से सर्वे कराया जा रहा है। सुकोला गांव का सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें 45 परिवार चिन्हित हुए हैं। 2011 के पुराने सर्वे में यहां केवल 22 परिवार दर्ज थे, लेकिन 14 सालों में कई युवक 21 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं, जिन्हें अब अलग परिवार मानते हुए पैकेज मिलेगा। इसी तरह क्रास्का गांव का सर्वे जल्द शुरू होगा। पुराने सर्वे के अनुसार यहां 210 परिवार थे, जिनमें से 131 विस्थापित हो चुके हैं। करीब 79 परिवार गांव में बचे थे। अब नए सर्वे में युवाओं के अलग परिवार गिने जाने से संख्या बढ़कर 150 परिवार हो गई है।
विस्थापित परिवारों को लक्ष्मणगढ़ रेंज में बसाने का प्रस्ताव
सरिस्का प्रशासन ने सुकोला और क्रास्का गांवों के परिवारों को अलवर वन मंडल के लक्ष्मणगढ़ रेंज में चिन्हित भूमि पर बसाने का प्रस्ताव तैयार किया है। ग्रामीण भी इस पर सहमति जता रहे हैं। योजना के अनुसार सुकोला गांव के परिवारों को मिलयारजाट, रायपुर, फुल्लावास और बेरला गांवों की जमीन पर बसाया जाएगा।
क्यों धीमी रही विस्थापन की प्रक्रिया?
वर्ष 2011 में हुए पुराने सर्वे के बाद विस्थापन की प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी। ग्रामीणों की मुख्य मांग थी कि 21 साल आयु पार करने वाले युवाओं को नया परिवार माना जाए और उन्हें भी पैकेज दिया जाए। सरकार ने अब यह मांग मान ली है। यही वजह है कि विस्थापन को लेकर ग्रामीणों का रुख सकारात्मक हुआ है।
वन्यजीवों को मिलेगा सुरक्षित आवास
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गांवों के विस्थापन से सरिस्का का वन्यजीव आवास और भी विस्तृत और सुरक्षित हो जाएगा। बाघों, तेंदुओं और अन्य जंगली जानवरों को विचरण के लिए बड़ा प्राकृतिक क्षेत्र उपलब्ध होगा। इससे जंगल में मानवीय दखल कम होगा और वन्यजीव संरक्षण को नई गति मिलेगी।
बाघों की बढ़ती संख्या और टैरिटरी का दबाव
वर्तमान में सरिस्का में बाघों का कुनबा बढ़कर 49 हो चुका है, जिनमें 11 नर बाघ, 18 बाघिन और 20 शावक शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जल्द ही कई शावक वयस्क होकर अपनी मां से अलग होंगे और उन्हें नई टैरिटरी (क्षेत्र) की जरूरत होगी। एक नर बाघ का विचरण क्षेत्र: 50–60 वर्ग किमी एक बाघिन का विचरण क्षेत्र: 30–40 वर्ग किमी अगर गांवों का विस्थापन नहीं हुआ तो नए और पुराने बाघों के बीच टैरिटरी को लेकर संघर्ष बढ़ सकता है। यही वजह है कि विस्थापन की रफ्तार तेज करना जरूरी है।


