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    हरियालो राजस्थान अभियान पर जोर, पर्यावरणविद् ने उठाए पौधों के संरक्षण के सवाल

    पौधारोपण अभियान की सफलता पर जोर, जीवित पौधों की समीक्षा और सुरक्षा की उठी मांग

    भीलवाड़ा। हरियालो राजस्थान अभियान के तहत राज्य सरकार ने भीलवाड़ा जिले में 35 लाख 38 हजार 338 पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य में पंचायतीराज विभाग को 15.84 लाख, शिक्षा विभाग को 9.04 लाख, वन विभाग को 1.98 लाख तथा अन्य विभागों को भी अलग-अलग संख्या में पौधारोपण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वन मंत्री संजय शर्मा को पत्र लिखकर अभियान की सफलता का आकलन केवल लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने की स्थिति के आधार पर करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष प्रदेश में 11 करोड़ 64 लाख पौधे लगाए गए थे, जिनकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा आवश्यक है।

    गत वर्ष लगाए गए पौधों की समीक्षा की मांग

    जाजू के अनुसार भीलवाड़ा जिले में पिछले वर्ष लगभग 45.72 लाख पौधे लगाए गए थे और उनकी जियो टैगिंग भी की गई थी, लेकिन वास्तविकता में 20 प्रतिशत से भी कम पौधे जीवित रह पाए। उनका कहना है कि इससे पौधों, सरकारी धन, समय और श्रम की बर्बादी होती है तथा आमजन का ऐसे अभियानों पर विश्वास भी प्रभावित होता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि कई विभागों के पास पर्याप्त भूमि और संसाधनों का अभाव होने के बावजूद हर वर्ष बड़े लक्ष्य निर्धारित करना व्यावहारिक नहीं है।

    पौधों को पेड़ बनाने पर दिया जोर

    पर्यावरणविद् ने जिला प्रशासन को सुझाव दिया कि इस वर्ष पौधारोपण के लक्ष्य को सीमित रखते हुए पौधों की सुरक्षा, सिंचाई, रखरखाव और जीवित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उनका मानना है कि अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें विकसित कर पेड़ बनाना होना चाहिए ताकि पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक लक्ष्य पूरा हो सके।

    स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता देने की सलाह

    जाजू ने स्थानीय जलवायु के अनुरूप नीम, पीपल, बरगद, करंज, शीशम, बेर, जामुन और इमली जैसे दीर्घायु एवं अधिक प्राणवायु देने वाले वृक्षों को प्राथमिकता देने की भी अपील की। उनका कहना है कि ऐसे वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी साबित होंगे।

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