जम्मू। जम्मू-कश्मीर में मानसून के पूर्ण रूप से सक्रिय होने के साथ ही जनजीवन पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने लगा है। बीते एक दिन में राज्य के विभिन्न अंचलों में हुई भारी वर्षा ने आफत बढ़ा दी है। इसी बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाले पूरे सप्ताह के दौरान रुक-रुक कर तूफानी बारिश का सिलसिला जारी रहने की आशंका जताई है। संभावित खतरों को देखते हुए आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों, तीर्थयात्रियों तथा वाहन चालकों के लिए कड़े चेतावनी निर्देश जारी किए हैं।
भारी वर्षा से थमे कदम और बढ़ा जलस्तर
बीते 24 घंटों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो सांबा जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहाँ 87 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वहीं धार्मिक नगरी कटरा में 71.2 मिमी, उधमपुर में 65 मिमी तथा प्रांतीय राजधानी जम्मू में 52 मिमी पानी बरसा। इस अनवरत बारिश के कारण निचले इलाकों में जलजमाव की गंभीर समस्या पैदा हो गई है, जबकि पहाड़ी मार्गों पर चट्टानें खिसकने का जोखिम चरम पर पहुँच गया है।
आगामी दिनों में प्राकृतिक आपदा का बड़ा खतरा
मौसम विशेषज्ञों द्वारा जारी नवीन परामर्श के अनुसार, 29 जुलाई से 2 अगस्त के मध्य जम्मू संभाग के संवेदनशील पर्वतीय जिलों में स्थिति अधिक चिंताजनक हो सकती है। इस दौरान अचानक बाढ़ आने, पहाड़ियों से मलबे का बहाव होने और बड़े पैमाने पर भूस्खलन की पूरी संभावना है। जल स्रोतों तथा पहाड़ी ढलानों के समीप स्थित बस्तियों को विशेष रूप से अलर्ट पर रखा गया है।
सप्ताह भर के मौसम का विस्तृत पूर्वानुमान
आगामी 31 जुलाई को राज्य के अधिकांश हिस्सों में बिजली की गड़गड़ाहट के साथ मध्यम वर्षा का अनुमान है, जबकि जम्मू के मैदानी व निचले इलाकों में सुबह और शाम के समय मूसलाधार बौछारें पड़ सकती हैं। इसके उपरांत 1 और 2 अगस्त को वर्षा की तीव्रता में हल्का उतार-चढ़ाव रहेगा, किंतु कई स्थानों पर तेज़ बौछारों का दौर बना रहेगा। सबसे कठिन समय 3 से 5 अगस्त के बीच रहने की आशंका है, जब जम्मू संभाग के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। तत्पश्चात 6 और 7 अगस्त को भी मौसम के मिज़ाज में विशेष सुधार की संभावना नहीं है और हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहेगी।
आम जनता व यात्रियों के लिए सुरक्षा निर्देश
गंभीर परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नागरिक प्रशासन ने सभी यात्रियों, पर्यटकों और परिवहन संचालकों से केवल प्राधिकृत सूचनाओं पर ही विश्वास करने तथा यात्रा पूर्व मार्ग की स्थिति जांचने का आग्रह किया है। लोगों को उफनते नालों, नदियों, झरनों और कटाव वाले इलाकों से पूरी तरह दूर रहने की सख्त ताकीद की गई है। इसके अतिरिक्त, प्रतिकूल मौसम की स्थिति में अनावश्यक यात्रा टालने और सुरक्षित आशियानों में ही शरण लेने का परामर्श दिया गया है।


