जबलपुर। बीते दिनों डिप्टी CM विजय शर्मा ने अपने नागपुर प्रवास के दौरान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) के धवईपानी (चिल्फी) से कवर्धा होते हुए सिमगा तक लगभग 122 किलोमीटर लंबे सेक्शन को 4-लेन में उन्नत करने और कवर्धा बायपास (4L+PS) के निर्माण की स्वीकृति का आग्रह किया. केंद्रीय मंत्री गडकरी ने तुरंत मंजूरी दे दी।
धवईपानी से सिमगा तक बनेगा 4-लेन
उन्होंने केंद्रीय मंत्री गडकरी को बताया कि हाल ही में NH-30 के जबलपुर से मंडला और चिल्फी तक लगभग 160 कि.मी. के सेक्शन को 4-लेन में विकसित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है. वर्तमान में चिल्फी (धवईपानी) से कवर्धा और कवर्धा गुरूनाला से सिमगा तक का मार्ग 10 मीटर चौड़ाई की 2-लेन सड़क के रूप में निर्मित है. चिल्फी से रायपुर मार्ग पर वर्तमान में व्यावसायिक एवं भारी वाहनों का अत्यधिक आवागमन होता है। जबलपुर-मंडला-चिल्फी सेक्शन के 4-लेन बनने के बाद यातायात का दबाव आगे के 2-लेन सेक्शन पर और अधिक बढ़ने की संभावना है. ऐसी स्थिति में लोक सुरक्षा एवं यातायात सुगमता के दृष्टिकोण से धवईपानी (चिल्फी) से सिमगा (रायपुर) तक के पूरे सेक्शन को 4-लेन में उन्नत करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
अभी 2-लेन की सड़क
वर्तमान में चिल्फी (धवईपानी) से कवर्धा तथा कवर्धा गुरूनाला से सिमगा तक का मार्ग 10 मीटर चौड़ाई की 2-लेन सड़क के रूप में निर्मित है. चिल्फी से रायपुर मार्ग पर व्यावसायिक एवं भारी वाहनों का अत्यधिक आवागमन होता है. जबलपुर-मंडला-चिल्फी सेक्शन के 4-लेन बनने के बाद आगे के 2-लेन सेक्शन पर यातायात दबाव और बढ़ने की संभावना है. ऐसे में लोक सुरक्षा और यातायात सुगमता की दृष्टि से धवईपानी (चिल्फी) से सिमगा (रायपुर) तक पूरे खंड को 4-लेन में उन्नत करना आवश्यक बताया गया।
अंतर्राज्यीय मार्ग की बढ़ती अहमियत
जबलपुर से रायपुर के मध्य एनएच-30 पर जिला कबीरधाम मुख्यालय कवर्धा स्थित है. यह अंतर्राज्यीय मार्ग व्यावसायिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मालवाहक वाहनों का आवागमन होता है।
कवर्धा बायपास निर्माण की भी मांग
शर्मा ने कवर्धा शहर में बढ़ते भारी यातायात के दबाव को कम करने और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर (4L+PS) बायपास निर्माण की मांग भी रखी. उनका कहना था कि बायपास बनने से शहर के भीतर दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी और यातायात सुचारू रूप से संचालित हो सकेगा।


