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    189 भारतीयों समेत 5,285 लोग अब भी लापता, नेपाल ने सर्च ऑपरेशन रोका

    काठमांडू। नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में करीब डेढ़ महीने पहले आई भयंकर बाढ़ के कारण भारी तबाही मची थी, जिसमें हजारों लोग पानी में बह गए थे। इस प्राकृतिक आपदा में कुल 1,455 लोगों की जान चली गई, जबकि 5,285 लोग अब भी लापता बने हुए हैं। लापता लोगों में 189 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इन सबके बीच नेपाल सरकार ने सोमवार को यह फैसला लिया है कि बाढ़ के बाद से चलाए जा रहे गैर-जरूरी खोज और बचाव अभियानों को अब रोका जा रहा है, यानी अब लापता लोगों की तलाश का काम बंद कर दिया जाएगा और पूरा ध्यान पुनर्निर्माण व पुनर्वास पर केंद्रित होगा।

    प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में लिया गया फैसला

    यह अहम निर्णय प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन परिषद की एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। जिला आपदा प्रबंधन समितियों, राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी दौरा करने वाली विशेष टीमों की सिफारिशों के आधार पर ही यह कदम उठाया गया है। आपदा के इस हादसे में देश-विदेश के कई पर्यटक भी लापता हुए हैं, जिनमें भारत के 189, अमेरिका के 65, मलेशिया के 55, यूक्रेन के 54, चीन के 37, ऑस्ट्रेलिया व लातविया के 33-33, ब्रिटेन के 32 और कनाडा के 30 नागरिक शामिल हैं, इसके अलावा 188 नेपाली पर्यटक भी लापता लोगों की सूची में हैं। भारतीय नागरिकों की बात करें तो तमिलनाडु से 85, पश्चिम बंगाल से 37, गुजरात से 30, तेलंगाना से 25, उत्तर प्रदेश से 22, कर्नाटक से 13, आंध्र प्रदेश से 13, बिहार से 12, महाराष्ट्र से 10 से अधिक और ओडिशा से 4 लोग शामिल हैं जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

    पुनर्निर्माण और पुनर्वास के लिए भारी-भरकम बजट की सिफारिश

    नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन परिषद ने तबाही से जूझ रहे क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और प्रभावितों के पुनर्वास से जुड़ी कुल 504 परियोजनाओं के लिए वित्त मंत्रालय से 559 अरब नेपाली यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 35,000 करोड़ रुपये मंजूर करने की सिफारिश की है। ये विभिन्न कार्यक्रम और योजनाएं अलग-अलग मंत्रालयों तथा सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत की गई हैं। जिन योजनाओं की लागत का आकलन अभी तक पूरी तरह तय नहीं किया जा सका है, उनके लिए अतिरिक्त धनराशि जुटाने की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। इसके साथ ही नेपाल में अब राहत कार्यों का दायरा समेटते हुए पूरी तरह से प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

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