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    बिलासपुर के 8 साल के अद्विक ने किया बड़ा कमाल

    बिलासपुर| बिलासपुर के एक छोटे से बालक ने यह सिद्ध कर दिया है कि संकल्प यदि बड़ा हो, तो आयु की सीमाएं कभी आड़े नहीं आतीं। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के रहने वाले महज 8-9 साल के नन्हे अद्विक मिश्रा आज न केवल अपने जिले के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए 'पर्यावरण योद्धा' के रूप में एक मिसाल बन चुके हैं।

    आधुनिक दौर में जहाँ अधिकतर बच्चे अपना खाली समय मोबाइल गेम्स, सोशल मीडिया या टीवी देखने में बिताते हैं, वहीं अद्विक अपनी छोटी सी उम्र में ही पृथ्वी को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के एक अत्यंत महत्वपूर्ण मिशन पर समर्पित हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके इसी असाधारण जज्बे और अद्वितीय समर्पण को देखते हुए हाल ही में राजधानी रायपुर में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें ‘पर्यावरण प्रेमी’ के प्रतिष्ठित सम्मान से विभूषित किया गया।

    कक्षा पहली से ही जागृत हो गया था प्रकृति प्रेम

    बिलासपुर के रिंग रोड नंबर-2 के निवासी दीपक मिश्रा के सुपुत्र अद्विक मिश्रा वर्तमान में डीपीएस (DPS) बिलासपुर में कक्षा चौथी के मेधावी छात्र हैं। अद्विक का प्रकृति और हरियाली के प्रति यह लगाव कोई आकस्मिक घटना नहीं है। जब वे महज 6-7 साल के थे और पहली या दूसरी कक्षा में पढ़ते थे, तभी से उन्हें पौधों से एक विशेष जुड़ाव महसूस होने लगा था।

    शुरुआत में उन्होंने खेल-खेल में अपने घर के आंगन और पास की खाली जमीनों पर फलदार और छायादार पौधे लगाने शुरू किए। धीरे-धीरे यह शौक एक गंभीर संकल्प में बदल गया और अद्विक ने ठान लिया कि वे जहां भी खाली जगह देखेंगे, वहां एक नया जीवन (पौधा) रोपेंगे।


    नन्हे हाथों का विशाल लक्ष्य: 1500 से अधिक वृक्षों का रोपण

    अद्विक की मेहनत का प्रमाण उन क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई देता है जहां उनके द्वारा लगाए गए पौधे आज लहलहा रहे हैं। अपनी व्यक्तिगत पहल और अथक परिश्रम के बल पर वे अब तक 1500 से 2000 के बीच पेड़-पौधे लगा चुके हैं।

    • अभिभावक जैसा समर्पण: अद्विक की विशेषता केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है। वे उन पौधों को लगाकर भूलते नहीं, बल्कि एक सच्चे अभिभावक की तरह उनकी नियमित देखभाल करते हैं, उन्हें पानी देते हैं और उनके सुरक्षित बढ़ने तक उनकी निगरानी भी करते हैं।

    • समय का सदुपयोग: स्कूल से आने के बाद या छुट्टियों के दौरान, जब अन्य बच्चे खेलने में व्यस्त होते हैं, अद्विक नई जगहों की तलाश करते हैं जहाँ वे और अधिक पौधे लगा सकें।


    राजधानी में गूंजी अद्विक के प्रयासों की धमक

    इस नन्हे बालक के निस्वार्थ प्रयासों की चर्चा अब प्रदेश स्तर पर होने लगी है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अद्विक के इस महान कार्य को पहचाना और रायपुर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया।

    आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अद्विक के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें मंच पर सम्मानित किया और उन्हें समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बताया।

    समाज के लिए एक बड़ा सबक

    सम्मान समारोह के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि अद्विक जैसे बच्चे हमारे राष्ट्र की वास्तविक संपत्ति हैं। उन्होंने आगे कहा:"अद्विक ने जो कर दिखाया है, वह उन सभी वयस्कों के लिए एक गहरी सीख है जो केवल सम्मेलनों और भाषणों में पर्यावरण की चिंता करते हैं। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी विकट समस्याओं का समाधान केवल चर्चाओं से नहीं, बल्कि अद्विक जैसे धरातल पर काम करने वाले योद्धाओं से ही संभव है।"

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