More
    Homeराजस्थानभरतपुरशीशम तिराहे के प्रस्तावित सर्किल पर उठे सवाल, तकनीकी परीक्षण की उठी...

    शीशम तिराहे के प्रस्तावित सर्किल पर उठे सवाल, तकनीकी परीक्षण की उठी मांग

    शहर की पहचान बचाने के लिए सर्किल निर्माण पर विशेषज्ञों की राय जरूरी, शीशम तिराहे का डिजाइन वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप बनाने का सुझाव

    भरतपुर। शहर के प्रमुख प्रवेश द्वार शीशम तिराहे पर प्रस्तावित सर्किल निर्माण को लेकर समृद्ध भारत अभियान ने जिला प्रशासन को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने जिला कलक्टर को पत्र लिखकर मांग की है कि सर्किल का निर्माण विशेषज्ञों के तकनीकी परीक्षण और वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद ही कराया जाए, ताकि शहर की ऐतिहासिक पहचान, सौंदर्य और भविष्य की यातायात व्यवस्था सुरक्षित रह सके।

    उन्होंने कहा कि शीशम तिराहा केवल एक यातायात चौराहा नहीं, बल्कि भरतपुर की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक गौरव और पर्यटकों के लिए शहर का प्रमुख प्रवेश द्वार है। ऐसे में यहां होने वाला कोई भी निर्माण शहर की पहचान के अनुरूप होना चाहिए।

    भव्यता के साथ भविष्य की यातायात व्यवस्था पर भी हो ध्यान

    सीताराम गुप्ता ने पत्र में कहा कि वर्तमान प्रस्तावित डिजाइन को लेकर आशंका है कि इससे प्रवेश द्वार की दृश्यता और आकर्षण प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य शहर की सुंदरता और पहचान को मजबूत करना होना चाहिए, न कि उसे कम करना।

    उन्होंने सुझाव दिया कि सर्किल का आकार, स्थान और डिजाइन ट्रैफिक इंजीनियरिंग के वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में बढ़ने वाले यातायात दबाव को भी आसानी से संभाला जा सके।

    स्थायी जाम और दुर्घटनाओं की आशंका जताई

    पत्र में उल्लेख किया गया है कि शीशम तिराहा शहर के सबसे व्यस्त यातायात जंक्शनों में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। यदि निर्माण वैज्ञानिक तरीके से नहीं हुआ तो भविष्य में स्थायी यातायात जाम, सड़क दुर्घटनाओं और एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं के संचालन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    उन्होंने कहा कि स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और वाहन चालकों के बीच भी प्रस्तावित निर्माण को लेकर कई आशंकाएं हैं, इसलिए किसी भी स्थायी निर्माण से पहले व्यापक तकनीकी परीक्षण आवश्यक है।

    विशेषज्ञ समिति और जन सुझाव के बाद हो अंतिम स्वीकृति

    समृद्ध भारत अभियान ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य का स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए तथा विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोकने पर विचार किया जाए।

    साथ ही यातायात पुलिस, सार्वजनिक निर्माण विभाग, नगर निगम और स्वतंत्र यातायात विशेषज्ञों की संयुक्त समिति से स्थल निरीक्षण कर भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अंतिम डिजाइन तैयार कराया जाए। इसके अलावा स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों के सुझाव लेने के बाद ही अंतिम स्वीकृति प्रदान की जाए।

    सीताराम गुप्ता ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों का विरोध करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन से होने वाला प्रत्येक निर्माण वैज्ञानिक, सुरक्षित, दूरदर्शी और जनहितकारी हो तथा भरतपुर की ऐतिहासिक पहचान और प्रवेश द्वार की भव्यता अक्षुण्ण बनी रहे।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here