नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। इस बार का पूरा सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष के जोरदार हंगामे, नारेबाजी और प्रदर्शनों की भेंट चढ़ गया। सत्र की समाप्ति के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक-दूसरे पर संसदीय गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। जहां कांग्रेस ने इसे विपक्ष की बड़ी कामयाबी बताया, वहीं बीजेपी ने पूरे गतिरोध का ठीकरा राहुल गांधी के रवैये पर फोड़ा।
विपक्ष के दबाव से रुके कई बिल: कांग्रेस
सत्र समापन के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि पूरे सत्र में मोदी सरकार विपक्ष के भारी दबाव में रही, जिसके चलते सरकार अपने कई विवादित प्रस्तावों को पास नहीं करा सकी। उन्होंने विपक्ष की मुख्य उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उनके विरोध के कारण ही 'वन नेशन, वन इलेक्शन', विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, एफसीआरए (FCRA) संशोधन, परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन और गिरफ्तार जनप्रतिनिधियों को पद से हटाने वाले विधेयक आगे नहीं बढ़ सके। साथ ही कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सदन से लगातार अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए।
राहुल गांधी के अहंकार की बलि चढ़ा सत्र: बीजेपी
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के इन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया। बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने पलटवार करते हुए कहा कि मानसून सत्र की नाकामी के पीछे विपक्ष के नेता का गैर-जिम्मेदाराना रवैया और अहंकार जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी मांगों को बार-बार बदलकर केवल संसद ठप करना चाहता था।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन पर घेरा
राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वे अपनी बहन के साथ बिना अनुमति प्रधानमंत्री आवास के मुहाने पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि जिनके पिता, दादी और परदादा देश के प्रधानमंत्री रह चुके हों, उन्हें इस बात की समझ होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री निवास कितना संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थान होता है। बीजेपी ने साफ किया कि कांग्रेस का सफलता का दावा केवल एक राजनीतिक प्रोपेगैंडा है।


