More
    Homeराज्यमहाराष्ट्ररोज के झगड़े मानसिक क्रूरता नहीं कोर्ट से तलाक की याचिका खारिज

    रोज के झगड़े मानसिक क्रूरता नहीं कोर्ट से तलाक की याचिका खारिज

    मुंबई बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि वैवाहिक जीवन के रोजाना के छोटे-मोटे झगड़े या सामान्य मतभेद कानूनी रूप से मानसिक क्रूरता नहीं माने जा सकते, और न ही केवल इनके आधार पर तलाक दिया जा सकता है।

    नागपुर पीठ की अहम टिप्पणी

    बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी फाल्के और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक 44 वर्षीय व्यक्ति की तलाक की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि क्रूरता का आकलन किसी छिटपुट या अलग-अलग घटनाओं के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि पूरे वैवाहिक जीवन के समग्र परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए।

    मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

    इस मामले में पति ने अपनी पत्नी पर यह आरोप लगाया था कि वह अक्सर उससे और उसकी मां के साथ झगड़ा करती थी। वहीं, इसके विपरीत पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष के लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मां न बन पाने को लेकर उसके साथ लगातार दुर्व्यवहार किया गया। इससे पहले परिवार अदालत ने भी पति की तलाक की अर्जी ठुकरा दी थी और पत्नी को भरण-पोषण के रूप में पांच हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here