जीवनशैलीगत विकारों के समाधान पर मंथन, विशेषज्ञ बताएंगे आयुर्वेदिक प्रबंधन के व्यावहारिक तरीके
जयपुर। आधुनिक जीवनशैली के कारण तेजी से बढ़ रहे स्वास्थ्य संबंधी विकारों के समाधान और आयुर्वेद की भूमिका पर राष्ट्रीय स्तर पर मंथन होगा। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, डीम्ड विश्वविद्यालय, जयपुर में 17 एवं 18 सितंबर 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला आयोजित की जाएगी। शुक्रवार को संस्थान के कुलगुरु प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कार्यशाला के पोस्टर का विमोचन किया।
यह कार्यशाला विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान चिकित्सक प्रकोष्ठ एवं राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर डीम्ड विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होगी। कार्यशाला का विषय जीवनशैलीगत विकारों में आयुर्वेद की भूमिका रखा गया है।
हृदय रोग से पीसीओडी तक पर होगी चर्चा
राष्ट्रीय कार्यशाला में हृदय रोग, मधुमेह, यूरिनरी स्ट्रिक्चर एवं मूत्रवह संस्थानगत विकार, पीसीओडी और इनफर्टिलिटी सहित विभिन्न जीवनशैलीगत विकारों के आयुर्वेदिक प्रबंधन पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जानकारी दी जाएगी।
कार्यशाला में केवल सैद्धांतिक व्याख्यान ही नहीं, बल्कि रोग प्रबंधन से जुड़ी प्रायोगिक एवं क्लिनिकल जानकारी भी साझा की जाएगी। इसका उद्देश्य चिकित्सकों को ऐसी उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है, जिसका वे अपने दैनिक चिकित्सकीय कार्य में प्रभावी तरीके से उपयोग कर सकें।
आयुर्वेद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण
पोस्टर विमोचन के अवसर पर कुलगुरु प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में जीवनशैलीगत विकार केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौती बन चुके हैं। अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खान-पान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण ऐसे विकार लगातार बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोग के लक्षणों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति की प्रकृति, आहार, विहार और जीवनशैली में आवश्यक सुधार के माध्यम से स्वास्थ्य की मूल अवधारणा को मजबूत करने की क्षमता रखता है। इसलिए जीवनशैलीगत विकारों की रोकथाम और समग्र प्रबंधन में आयुर्वेद की भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्रो. शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद की वैज्ञानिक परंपरा और आधुनिक अनुसंधान के समन्वय से जीवनशैलीगत विकारों के लिए अधिक प्रभावी, सुरक्षित, व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक स्वास्थ्य समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने ऐसी कार्यशालाओं को चिकित्सकों के लिए शास्त्रीय ज्ञान और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच महत्वपूर्ण सेतु बताया।
देशभर से जुटेंगे आयुर्वेद चिकित्सक
विश्व आयुर्वेद परिषद, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में आयुर्वेद की प्रासंगिकता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने चिकित्सकों से जीवनशैलीगत विकारों के समग्र प्रबंधन के लिए आयुर्वेद की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टि को आमजन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
प्रदेश महासचिव डॉ. पवन सिंह शेखावत ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य आयुर्वेद चिकित्सकों को जीवनशैलीगत विकारों के प्रबंधन की प्रायोगिक और क्लिनिकल जानकारी उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान के साथ रोग प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी भी साझा की जाएगी।
आयोजकों ने कार्यशाला में देशभर से करीब 500 आयुर्वेद चिकित्सकों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। पोस्टर विमोचन के साथ ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर इकाई की अध्यक्ष प्रो. सुमन शर्मा, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रो. महेंद्र प्रजापति, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय जयपुर इकाई के अध्यक्ष डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा तथा आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर इकाई की ओर से डॉ. ब्रह्मानंद मौजूद रहे।
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