रायपुर: राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों के अतुलनीय योगदान को रेखांकित करते हुए छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग ने विगत ढाई वर्षों में कई ऐतिहासिक और कल्याणकारी कदम उठाए हैं। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में प्रशासनिक ढांचे का विस्तार करने के साथ-साथ श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वरोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव किए गए हैं।
प्रशासनिक विस्तार और 24 घंटे में लाइसेंस की सुविधा
श्रमिकों को त्वरित सेवाएं प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने 5 नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए हैं। इसके साथ ही 5 श्रम कार्यालयों को प्रमोट कर सहायक श्रमायुक्त कार्यालय का दर्जा दिया गया है, जिससे प्रदेश में अब कुल 33 श्रम कार्यालय क्रियाशील हो चुके हैं।
'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने हेतु 'छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021' में संशोधन कर श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र मात्र 24 घंटे के भीतर जारी करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा महिला श्रमिकों के लिए सुरक्षा मापदंड तय करते हुए कारखानों में उनके काम करने के अवसरों को सुगम बनाया गया है।
सामाजिक सुरक्षा के दायरे में 56 लाख से अधिक श्रमिक
छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल एवं अन्य संबद्ध मंडलों के माध्यम से राज्य के 56.83 लाख संगठित, निर्माण और असंगठित श्रमिकों का पंजीयन पूरा कर लिया गया है। वर्ष 2026 में 30 जून तक लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, कौशल उन्नयन व शिक्षा योजनाओं के तहत 173.32 करोड़ रुपये का लाभ दिया जा चुका है।
आवास सहायता व दीदी ई-रिक्शा योजना की राशि में बड़ी बढ़ोतरी
निर्माण श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए आर्थिक मदद के बजट में इजाफा किया गया है:
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना: घर निर्माण या क्रय हेतु दी जाने वाली सहायता राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दिया गया है।
दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना: महिला निर्माण श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ई-रिक्शा खरीद पर अनुदान राशि 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये की गई है।
शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहल
श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए अटल कैरियर निर्माण योजना शुरू की गई है, जिसके तहत मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग दी जाएगी। वहीं अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के माध्यम से श्रमिकों की नियमित जांच सुनिश्चित की जा रही है।
5 रुपये में भरपेट भोजन और डिजिटल साथी एप
शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना: प्रदेश के 18 जिलों में संचालित 39 केंद्रों के माध्यम से श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक और गर्म भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
ई-श्रम साथी एप: स्वयं पंजीयन और रोजगार अवसरों की सीधी जानकारी के लिए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है।
मॉडल लेबर चौक: श्रमिकों को सम्मानजनक माहौल देने के लिए विश्राम, पेयजल और पंजीयन की एकीकृत सुविधा वाले फैसिलिटेशन सेंटर बनाए जा रहे हैं।
दुर्घटना व मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा
कार्यस्थल दुर्घटना या अन्य परिस्थितियों में आर्थिक सहायता का कड़ा ढांचा तैयार किया गया है:
निर्माण श्रमिक (पंजीकृत): कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु पर 5 लाख रुपये, सामान्य मृत्यु पर 1 लाख रुपये और स्थायी दिव्यांगता पर 2.50 लाख रुपये की सहायता दी जाती है।
अपंजीकृत निर्माण श्रमिक: कार्यस्थल पर दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रितों को 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है।
असंगठित कर्मकार: पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु पर 1 लाख रुपये और दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये प्रदान किए जा रहे हैं।


