वॉशिंगटन: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दावा किया है कि दुनिया ने यह मान लिया है कि ईरान ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध जीत लिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, पेजेशकियन ने कहा है कि अब अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त होना चाहिए, क्योंकि पूरी दुनिया ईरान की इस जीत को स्वीकार कर चुकी है।
अमेरिका की ओर से बढ़ रहा आर्थिक दबाव
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों और दबाव को और अधिक कड़ा करने की योजना बना रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगाए और तेल एवं गैस टैंकरों के आवागमन के लिए रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह से खोले। ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, राष्ट्रपति का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका के इस दबाव का विरोध किया जा रहा है और ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान पर अभूतपूर्व आर्थिक अलगाव थोपने की घोषणा की गई है।
गोलान हाइट्स को लेकर अमेरिकी नीति पर चर्चा
इसी बीच, अमेरिका के तुर्किये में राजदूत और सीरिया के विशेष दूत टॉम बैरक की एक टिप्पणी ने गोलान हाइट्स को लेकर अमेरिकी रुख पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साक्षात्कार के दौरान बैरक ने उल्लेख किया कि इस्राइल का गोलान हाइट्स पर कब्जा अभी भी बना हुआ है, जो संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के विपरीत है। इस्राइल ने 1967 के युद्ध के दौरान सीरिया से इस क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल किया था और 1981 में इसे अपने क्षेत्र में मिला लिया था, जिसे संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मान्यता नहीं देता है। हालांकि, मार्च 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस क्षेत्र पर इस्राइल की संप्रभुता को मान्यता दी थी, और हाल ही में कोलंबिया भी ऐसा करने वाला दूसरा देश बन गया है। इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
पश्चिम एशिया में वर्तमान हालात
ईरान के राष्ट्रपति द्वारा जीत के इन दावों के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे हैं। एक तरफ अमेरिका ईरान पर अपनी आर्थिक शिकंजा कसने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट क्षेत्रीय और वैश्विक चिंता का बड़ा विषय बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, फ्रांस और सऊदी अरब जैसे देश होर्मुज के विकल्प के रूप में नए व्यापार मार्गों, पाइपलाइन और रेल नेटवर्क विकसित करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कूटनीतिक खींचतान और रणनीतिक हलचल अभी भी जारी है।


