पीड़ित का आरोप : बैंक अधिकारी शिकायत वापस लेने का बना रहे दबाव, कह रहे “क्लेम दिलवा देंगे”, जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई क्यों नहीं
अलवर । चेक फ्रॉड गिरोह सक्रिय है, सीसीटीवी में नजर आ रहा है पर पकड़ नहीं पा रहे, जिम्मेदारी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे है। मामला पुलिस तक है पर कार्रवाई लगभग ना के बराबर है। आरोपियों ने यस बैंक की भगत सिंह सर्किल शाखा के ड्रॉप बॉक्स से चेक चुराए, उनकी हूबहू डुप्लीकेट कॉपी तैयार की, और फिर उसी नंबर के क्लोन चेक की मदद से बैंक ऑफ इंडिया की भगत सिंह सर्किल शाखा से नकद रकम निकलवा ली।
डुप्लीकेट चेक से पैसा निकल जाने के कारण असली चेक बाउंस हो गया, जिसके बाद कंपनी बाग निवासी कारोबारी विनोद कुमार को इस फर्जीवाड़े का पता चला। पीड़ित का आरोप है कि बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ही क्लोन चेक आसानी से कैश हो गया, और अब बैंक अधिकारी शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं।
ट्रेडिंग का कारोबार करने वाले विनोद कुमार के अनुसार, उन्होंने 17 जुलाई 2026 को यस बैंक के एक कर्मचारी को दो चेक जमा करने के लिए दिए थे। इनमें से 5 लाख रुपए का पहला चेक उसी दिन क्लियर हो गया, लेकिन 2.40 लाख रुपए के दूसरे चेक को कर्मचारी ने पहले दिन जेब में ही रख लिया और अगले दिन ड्रॉप बॉक्स में डाला। यह चेक बाद में बाउंस हो गया।जांच में यस बैंक कर्मचारियों ने बताया कि इसी नंबर के एक अन्य चेक से बैंक ऑफ इंडिया से पहले ही 2.40 लाख रुपए नकद निकाले जा चुके थे। जब बैंक ऑफ इंडिया में पड़ताल की गई, तो सामने आया कि चेक क्लोन किया गया था।
सीसीटीवी में कैद हुई चोरी, दो युवक निकले संदिग्ध
यस बैंक के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर सामने आया कि 18 जुलाई को दो युवक ड्रॉप बॉक्स के पास पहुंचे । एक अंदर गया जबकि दूसरा बाहर निगरानी करता रहा। इसी दौरान आरोपी 7 से 8 चेक चुरा ले गए। दो दिन बाद, 20 जुलाई को इन्हीं क्लोन चेकों में से एक का इस्तेमाल कर बैंक ऑफ इंडिया शाखा से 2 लाख 40 हजार रुपए नकद निकाल लिए गए। पुलिस के अनुसार, अलवर शहर में अब तक ऐसे दो मामले सामने आ चुके हैं । एक खाते से 2.40 लाख रुपए और दूसरे खाते से 20 हजार रुपए निकाले गए।
बैंक ऑफ इंडिया पर लापरवाही के गंभीर आरोप
पीड़ित कारोबारी के बेटे हिमांश गुप्ता ने बताया कि मूल चेक पर सारी जानकारी अंग्रेजी में भरी गई थी, जबकि फर्जीवाड़े में इस्तेमाल हुए क्लोन चेक पर सब कुछ हिंदी में लिखा था। इतना ही नहीं, नकली चेक पर बैंक का सुरक्षा वॉटरमार्क तक मौजूद नहीं था। उनका आरोप है कि बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने न तो चेक का वॉटरमार्क जांचा, न ही इतनी बड़ी नकद राशि का भुगतान करने से पहले मूल खाताधारक को फोन कर सत्यापन किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि नकदी लेने वाले व्यक्ति से कोई पहचान पत्र (आईडी) तक नहीं मांगा गया।
शिकायत वापस लेने का दबाव, पुलिस जांच पर भी सवाल
पीड़ितों के मुताबिक, उन्होंने 29 जुलाई को कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद डीएसपी कार्यालय की टीम तीन बार बैंक पहुंचकर जांच भी कर चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
पीड़ितों का यह भी आरोप है कि बैंक अधिकारी लगातार उन पर पुलिस केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं और यह भरोसा दिला रहे हैं कि इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से उनका पैसा वापस दिलवा दिया जाएगा।
चार साल पहले भी हो चुकी है ऐसी ही घटना
गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2022 में भी इसी यस बैंक ड्रॉप बॉक्स से करीब 13 चेक चोरी हुए थे, जब माउंट लिटेरा जी स्कूल की फीस जमा कराने आए अभिभावकों के चेक निशाना बने थे। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल – यश बैंक, बैंक ऑफ इंडिया के मैंनेजर रटी रटाई बात कर रहे है कि हम जांच कर रहे है। सवाल यह ही है कि आखिर बैंक में ऐसा संभव है तो आम आदमी का पैसा कैसे सुरक्षित है।
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