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    ‘दुश्मन के काल हैं…’ राजनाथ सिंह ने जबलपुर में रखी 475 करोड़ के प्रोजेक्ट की नींव

    जबलपुर। देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र के मामले में जबलपुर ने आज ऐतिहासिक कदम रखा है. भारतीय सेना के सबसे ताकतवर हथियार T-72 टैंक की ओवरऑलिंग के लिए जबलपुर में 475 करोड रुपए की लागत के प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी गई. देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मौजूदगी में इस प्रोजेक्ट का भूमि पूजन किया गया।

    कर्मचारियों में गजब का उत्साह

    जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में वैसे तो 2 साल पहले ही टी-72 टैंक की ओवरऑलिंग का काम शुरू हो गया था लेकिन पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो टैंक भेजे गए. जिसको व्हीकल फैक्ट्री के कर्मचारियों ने बखूबी ओवरऑल किया. पूरे प्रशिक्षण सफल करने के बाद भारतीय सेना को टैंक दे दिए गए. इसके बाद बड़े प्रोजेक्ट के तौर पर अब हर साल 80 से ज्यादा टैंको की ओवरऑलिंग का काम जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री को मिलेगा. जिससे कर्मचारियों में गजब का उत्साह है. कर्मचारियों ने बताया कि किस तरीके से T-72 टैंकों की ओवर ओलिंग के लिए कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन अब जब तमाम तरह के सज्जो समान और उपकरण व्हीकल फैक्ट्री के पास होंगे तो बेहतर तरीके से ओवर ओलिंग का काम किया जा सकेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा?

    T-72 टैंक के अत्याधुनिक ओवरहॉलिंग प्रोजेक्ट के भूमि पूजन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संबोधित किया. उन्होंने कहा कि सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ये टैंक दुश्मन के लिए काल और जवानों की ताकत बनकर खड़े हैं. 450 करोड़ की लागत से जबलपुर में शुरू हुआ T-72 टैंकों के ओवरहालिंग का प्रोजेक्ट हर साल 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग की क्षमता होगी. जल्द ही इसे हर साल 230 टैंकों की ओवरहॉलिंग क्षमता तक बढ़ाने लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर में वॉर फेयर का चरित्र पूरी तरह बदल चुका है. अब तक सीमाओं में लड़े जाते रहे हैं युद्ध, लेकिन अब नई टेक्नोलॉजी, साइबर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी महत्व बढ़ गया है।

    टैंकों को ओवरऑलिंग की जरूरत है- रक्षामंत्री

    केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पहले बजट 46000 करोड़ का होता था. देश का रक्षा बजट जो अब बढ़कर 1 एक लाख 80 हज़ार करोड़ हो चुका है. साल 2014 में डिफेंस एक्सपोर्ट महज 1000 करोड़ का था जो अब 39000 करोड़ को पार कर गया है. साल 2028-29 तक 50000 करोड़ तक डिफेंस एक्सपोर्ट बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

    कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि दुनिया भारत को ट्रस्टेड डिफेंस और टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में देख रही है. हमारी फोर्स दुनिया के पॉवरफुल फोर्सस में से एक है. युद्ध में इस्तेमाल होने होने वाले टैंक सीमाओं पर आयरन वॉल बनकर खड़े हैं. आर्म्ड व्हीकल निगम लिमिटेड में 4400 टैंकों की सप्लाई की है, यह आंकड़ा गर्व करने वाली है. टैंक कठोर परिस्थितियों में काम करते हैं. ऐसे में उन पर विपरीत असर भी पड़ता है, इसलिए उनकी ओवरहॉलिंग की भी जरूरत है।

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