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    डीएलबी की घोर लापरवाही या सोची-समझी साजिश? जो चेयरमैन कभी बर्खास्त ही नहीं हुए, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में बर्खास्त कर दिया!

    खेड़ली के वरिष्ठ भाजपा नेता संजय गीजगढ़िया के साथ कथित अन्याय पर डीएलबी अफसर कटघरे में – कल नामांकन का आखिरी दिन

    अशोक जैन, कठूमर। राजस्थान के नगरीय निकाय विभाग यानी डीएलबी के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर इससे बड़ा सवाल और क्या हो सकता है कि जो व्यक्ति कभी बर्खास्त हुआ ही नहीं, उसे सरकारी रिकॉर्ड में बर्खास्त दिखा दिया जाए और फिर उसी कथित रिकॉर्ड के आधार पर उसे चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहरा दिया जाए!

    यह गंभीर मामला खेड़ली नगर पालिका के पांच साल तक चेयरमैन रहे और वरिष्ठ भाजपा नेता संजय गीजगढ़िया से जुड़ा है। आरोप बेहद गंभीर हैं और यदि रिकॉर्ड में ऐसी गलती हुई है तो यह सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के राजनीतिक भविष्य और प्रतिष्ठा से खिलवाड़ है। गीजगढ़िया क्षेत्र के बड़े भाजपा नेता ही नहीं बल्कि क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिक भी हैं।

    डीएलबी बताए – बर्खास्तगी का आदेश क्यों दिया है?

    सबसे सीधा सवाल डीएलबी के अफसरों से है – जब संजय गीजगढ़िया कभी बर्खास्त हुए ही नहीं तो सरकारी रिकॉर्ड में बर्खास्तगी किस आधार पर दर्ज की गई? किस अधिकारी ने यह जानकारी चढ़ाई? किस आदेश को आधार बनाया गया? क्या मूल दस्तावेज देखा गया? क्या खेड़ली नगर पालिका से रिकॉर्ड का मिलान किया गया? अगर कोई बर्खास्तगी आदेश है तो उसे सामने लाया जाए। अगर ऐसा कोई आदेश है ही नहीं तो फिर सरकारी रिकॉर्ड में यह गंभीर जानकारी आई कहां से? जवाब देना डीएलबी की जिम्मेदारी है।

    एक गलती और पूरा राजनीतिक जीवन कटघरे में!

    संजय गीजगढ़िया कोई गुमनाम व्यक्ति नहीं हैं। वे खेड़ली नगर पालिका के पांच साल चेयरमैन रहे हैं और स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय वरिष्ठ भाजपा नेता हैं। उनका परिवार भी खेड़ली के प्रतिष्ठित परिवारों में है। ऐसे व्यक्ति के नाम के साथ बर्खास्तगी जोड़ देना केवल कागज पर एक शब्द लिख देना नहीं है। इसका सीधा असर सम्मान, प्रतिष्ठा और राजनीतिक जीवन पर पड़ता है। और जब इसी आधार पर उन्हें चुनाव लड़ने के अयोग्य बताया जाने लगे तो सवाल और गंभीर हो जाता है। क्या एक सरकारी गलती के कारण किसी व्यक्ति का चुनाव लड़ने का अधिकार छीना जा सकता है?

    निकाय मंत्री झाबर सिंह खर्रा के लिए सीधी चुनौती

    अब सवाल सीधे नगरीय प्रशासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा से है। क्या मंत्री यह जांच करवाएंगे कि डीएलबी के रिकॉर्ड में बर्खास्तगी की कथित एंट्री किसने और किस आधार पर की? क्या वे यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी अधिकारी की गलती के कारण गीजगढ़िया का नामांकन प्रभावित न हो? क्या जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ जवाबदेही तय होगी?

    कल नामांकन का आखिरी दिन – अब बहाने नहीं चलेंगे

    सबसे गंभीर बात यह है कि कल नामांकन का अंतिम दिन है। इसलिए अब जांच के नाम पर लंबी प्रक्रिया, फाइल इधर से उधर और अधिकारी से अधिकारी तक चक्कर लगाने का समय नहीं है। यदि रिकॉर्ड गलत है तो तुरंत सुधारा जाए। यदि बर्खास्तगी हुई है तो आदेश सार्वजनिक किया जाए। यदि कोई बर्खास्तगी हुई ही नहीं तो गीजगढ़िया की पात्रता तत्काल स्पष्ट की जाए।

    आज गीजगढ़िया हैं, कल कोई आम आदमी होगा

    यह मामला सिर्फ एक भाजपा नेता का नहीं है। आज संजय गीजगढ़िया जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति के रिकॉर्ड में कथित गंभीर गलती सामने आई है। कल यही गलती किसी आम नागरिक के साथ हो सकती है। अगर पांच साल तक नगर पालिका की जिम्मेदारी संभाल चुके चेयरमैन के रिकॉर्ड की ऐसी हालत हो सकती है तो आम आदमी अपने सरकारी रिकॉर्ड पर कैसे भरोसा करे?

    अब असली सवाल

    – क्या यह महज लापरवाही है?
    – किसने रिकॉर्ड में बर्खास्तगी दर्ज की?
    – किस दस्तावेज के आधार पर की?
    – किसने इसकी जांच की?
    – चुनाव लड़ने से रोकने की बात किस आधार पर आई?
    – और यदि गलती हुई है तो जिम्मेदार कौन है?

    खेड़ली की जनता इन सवालों के जवाब मांग रही है। सरकार को चुप्पी तोड़नी होगी, डीएलबी को रिकॉर्ड सामने रखना होगा और यदि गलती हुई है तो नामांकन की अंतिम तारीख से पहले उसे सुधारना होगा। क्योंकि लोकतंत्र में सरकारी गलती की सजा किसी उम्मीदवार को नहीं दी जा सकती।

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