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    पूर्व संसदीय सचिव हनुमानप्रसाद गर्ग का निधन, जिस प्रत्याशी को लड़ाया वह 6 बार बना विधायक

    राजगढ़. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव हनुमानप्रसाद गर्ग का मंगलवार को पचोर में निधन हो गया। उनके देहावसान का समाचार मिलते ही संपूर्ण राजगढ़ जिले और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। दोपहर लगभग दो बजे पचोर स्थित मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके पुत्र दुर्गेश गर्ग ने मुखाग्नि दी। उनकी अंतिम यात्रा में विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों से जुड़े गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

    नरसिंहगढ़ के पूर्व विधायक और जिला प्रभारी मंत्री के रूप में निभाई भूमिका

    हनुमानप्रसाद गर्ग ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली। वे वर्ष 1990 से 1993 तक राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रहे। इस दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश शासन में संसदीय सचिव तथा राजगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में कार्य किया। भाजपा के समर्पित नेता होने के साथ-साथ उन्होंने वैश्य समाज को संगठित करने में भी प्रमुख भूमिका निभाई और प्रांतीय अध्यक्ष के पद तक पहुंचे।

    1977 का चर्चित चुनावी किस्सा: “मुझे देख लो और वोट दे दो”

    गर्ग का राजनीतिक सफर जनसंघ के समय से प्रारंभ हुआ था। वर्ष 1977 में जनता पार्टी ने उन्हें सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रचार का प्रभार सौंपा था, जहां पार्टी उम्मीदवार अमरसिंह कोठार को 'हाथी' चुनाव चिह्न आवंटित हुआ था। अपने भारी-भरकम शरीर (लगभग 122 किलो वजन) के कारण वे ग्रामीणों के बीच रोचक अंदाज में कहते थे, “हाथी चिह्न को मत देखो, मुझे देख लो और वोट दे दो। समझो कि मैं ही हाथी हूं।” उनका यह ठेठ और सहज अंदाज बेहद लोकप्रिय हुआ। उस चुनाव में कोठार पहली बार विधायक चुने गए और आगे चलकर वे लगातार पांच चुनाव और जीते। गर्ग की इसी राजनीतिक समझ का लोहा माना जाता था।

    बोड़ा के छोटे कस्बे से राष्ट्रीय स्तर तक बनाई पहचान

    एक छोटे कस्बे बोड़ा से अपनी जीवन-यात्रा शुरू करने वाले गर्ग ने व्यापार, राजनीति और समाजसेवा में अपनी अमिट छाप छोड़ी। वे अग्रवाल समाज के प्रमुख भामाशाह, इंटरनेशनल वैश्य समाज के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, वैश्य महासंघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित स्वयंसेवक रहे।

    अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब और प्रशासनिक अमला

    दिवंगत नेता को अंतिम विदाई देने के लिए राज्यमंत्री गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री नारायणसिंह पंवार, नरसिंहगढ़ विधायक मोहन शर्मा सहित अपर कलेक्टर प्रतापसिंह मंडलोई, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के.एल. बंजारे और एसडीएम जय सोलंकी समेत भारी संख्या में नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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