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    विदेश भागकर बच नहीं पाया करण आसवानी, दुबई से पकड़कर जयपुर लाई AGTF

    जयपुर। राजधानी जयपुर में पुलिस की वर्दी पहनकर एक प्रतिष्ठित व्यापारी का अपहरण करने और फिरौती वसूलने के सनसनीखेज मामले में राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) को बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता मिली है। वारदात के बाद देश छोड़कर फरार हुए मुख्य षड्यंत्रकारी करण आसवानी उर्फ कमल सिंधी को संयुक्त अरब अमीरात (दुबई/अबू धाबी) से दबोच लिया गया है। राजस्थान पुलिस की विशेष टीम इंटरपोल और यूएई की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय से आरोपी को हिरासत में लेकर गुरुवार देर रात जयपुर पहुंच चुकी है। यह पूरी कार्रवाई एडीजी (एटीएस, एएनटीएफ व एजीटीएफ) दिनेश एमएन के कुशल निर्देशन और डीआईजी योगेश यादव व एएसपी सिद्धांत शर्मा की निगरानी में अंजाम दी गई।

    खाकी की आड़ में व्यापारी का अपहरण और करोड़ों की फिरौती का खेल

    यह संगीन मामला जयपुर के खोह नागोरियान थाना क्षेत्र का है। 20 अगस्त 2025 को व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता अपने चालक योगेश के साथ वैशाली नगर जाने के लिए घर से निकले थे, जिसके बाद उनका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया। अगले दिन परिजनों को अपहृत व्यापारी के ही फोन से कॉल कर फिरौती की भारी-भरकम मांग की गई। परिजनों की सूचना पर पुलिस तुरंत हरकत में आई और त्वरित अभियान चलाकर व्यापारी व उनके चालक को सकुशल मुक्त कराने में सफलता प्राप्त की।

    जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों हर्ष गौतम, कनक गांगुली और अजय बेनीवाल उर्फ शाका को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह शातिर गिरोह खाकी वर्दी पहनकर खुद को पुलिस अधिकारी बताता था और संभ्रांत कारोबारियों को रोककर उनका अपहरण कर लेता था। आरोपियों ने पीड़ित को आगरा सहित विभिन्न ठिकानों पर बंधक बनाकर रखा था। पुलिस ने इनके कब्जे से पीड़ित की इनोवा क्रिस्टा और वारदात में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट कार भी बरामद की थी।

    वारदात के बाद दुबई हुआ फरार, रेड कॉर्नर नोटिस से कसा शिकंजा

    मामले की विस्तृत जांच में जब करण आसवानी की मुख्य भूमिका और साजिशकर्ता के रूप में संलिप्तता सामने आई, तब तक वह गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्जीवाड़े के जरिए देश छोड़कर दुबई भाग चुका था। इसके बाद राजस्थान पुलिस ने अदालत से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट प्राप्त किया और केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी कराया। राजस्थान एजीटीएफ ने अबू धाबी इंटरपोल और यूएई पुलिस से सतत खुफिया जानकारी साझा की और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर उसकी सटीक लोकेशन ट्रेस कर वहां की स्थानीय पुलिस द्वारा उसे डिटेन कराया।

    एजीटीएफ की विशेष टीम दुबई से लेकर पहुंची जयपुर

    अबू धाबी में आरोपी के हिरासत में आने के बाद प्रत्यर्पण और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए 31 अगस्त को एएसपी सिद्धांत शर्मा, डीएसपी रविंद्र प्रताप, इंस्पेक्टर सुनील जांगिड़ और राम सिंह नाथावत की विशेष टीम दुबई रवाना हुई थी। तमाम अंतरराष्ट्रीय कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए टीम गुरुवार देर रात आरोपी को फ्लाइट से जयपुर लेकर लौटी। पुलिस अब रिमांड पर लेकर उससे गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, हवाला नेटवर्क और अन्य अपराधों के बारे में गहन पूछताछ करेगी।

    ढाई दशक पुराना खौफनाक आपराधिक इतिहास

    करण आसवानी कोई सामान्य अपराधी नहीं बल्कि पिछले 25 वर्षों से राजस्थान के संगठित अपराध जगत में सक्रिय रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2000 में उसके खिलाफ मुरलीपुरा थाने में हत्या का पहला संगीन मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद 2003, 2005 और 2009 में शिप्रापथ व मानसरोवर थानों में बलवा, घर में घुसकर जानलेवा हमले और डकैती के केस दर्ज हुए।

    हाल के वर्षों में वह फिरौती और अपहरण के सिंडिकेट का सरगना बन चुका था। वर्ष 2023 में बिंदायका, मानसरोवर और खोह नागोरियान थानों में उसके विरुद्ध जबरन वसूली और अपहरण के कई मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2025 में फर्जी पुलिसकर्मी बनकर व्यापारी के अपहरण का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने उस पर संगठित अपराध अधिनियम के तहत भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया था।

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