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    चांद पर इंसानी शहर बसाने का सपना मुश्किल! रिसर्च में पानी की सीमित उपलब्धता पर चिंता

    वाशिंगटन। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के रूप में पानी मिलने की शुरुआती पुष्टि के बाद दुनिया भर के दिग्गज अंतरिक्ष उद्यमियों—जैसे स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क और अमेजॉन के संस्थापक जेफ बेजोस—ने वहाँ भविष्य में इंसानी बस्तियों और बड़े शहरों को बसाने के बड़े-बड़े सपने देखे थे। इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के बाद अंतरिक्ष वैज्ञानिक और कारोबारी चांद पर स्थायी ठिकाने, औद्योगिक इकाइयां और कॉलोनियां स्थापित करने की कल्पना कर रहे थे। हालांकि, हाल ही में सामने आए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इन योजनाओं के सामने पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अनुमान से करीब तीस गुना कम हो सकता है चांद पर पानी

    वैज्ञानिकों के ताजा शोध के अनुसार, चंद्रमा के ध्रुवीय इलाकों में मौजूद पानी की वास्तविक मात्रा पहले लगाए गए पुराने आकलनों से काफी कम है। पूर्व के अनुमानों में चांद के गहरे गड्ढों और 'कोल्ड ट्रैप' (जहां अरबों वर्षों से सूर्य की किरणें नहीं पहुँची हैं) में लगभग एक अरब टन पानी बर्फ के रूप में होने की संभावना जताई गई थी। इसके विपरीत, नई स्टडी से यह संकेत मिलते हैं कि वहाँ मौजूद पानी की वास्तविक मात्रा अनुमानित आंकड़ों से लगभग तीस गुना तक कम हो सकती है। यदि यह डेटा सही साबित होता है, तो चंद्रमा की सतह पर लाखों लोगों की आबादी वाला विशाल शहर बसाना बेहद कठिन और अव्यवहारिक हो जाएगा।

    ऊर्जा की उपलब्धता नहीं है कोई बड़ी बाधा

    शोध में यह भी रेखांकित किया गया है कि चांद पर ऊर्जा (बिजली) की समस्या पानी जितनी गंभीर नहीं है। ध्रुवीय क्षेत्रों में कुछ ऊंचे स्थान ऐसे हैं जहाँ लंबे समय तक सूर्य की सीधी रोशनी मिल सकती है, जिससे वहाँ बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा सकते हैं। इसके अलावा, चांद की मिट्टी में प्रचुर मात्रा में मौजूद सिलिकॉन का उपयोग भविष्य में वहीं स्थानीय स्तर पर सौर पैनल बनाने के लिए भी किया जा सकता है। इससे बिजली उत्पादन और अन्य औद्योगिक गतिविधियों की राह तो आसान हो सकती है, लेकिन पानी का सीमित भंडार बस्तियों के विकास में सबसे बड़ी रुकावट बन सकता है।

    बड़े शहरों के बजाय छोटे गांवों की स्थापना हो सकती है व्यावहारिक

    अध्ययन के मुताबिक, पानी के अत्याधुनिक पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) के बावजूद, यदि दस लाख लोगों की आबादी का कोई शहर बसाया जाए, तो उपलब्ध जल भंडार कुछ ही वर्षों में समाप्त हो सकता है। इन नई गणनाओं के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि महा-नगरों के मुकाबले लगभग एक हजार लोगों की आबादी वाला छोटा गांव या दस हजार की आबादी वाला कस्बा ही चंद्रमा की परिस्थितियों में अधिक व्यावहारिक विकल्प होगा। हालांकि, अंतरिक्ष शोधकर्ता अभी पूरी तरह निराश नहीं हैं; जल पुनर्चक्रण तकनीकों को और उन्नत बनाने, कम पानी की खपत वाली कृषि पद्धतियों और भविष्य में क्षुद्रग्रहों (Asteroids) से पानी लाने जैसी संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सबसे बड़ी उम्मीद अब चंद्रमा की सतह के नीचे गहराई में छिपे अतिरिक्त और अप्रत्यक्ष जल भंडारों की खोज पर टिकी है।

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