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    Homeराज्यमहाराष्ट्रसाहिल वाकोडे केस में आमने-सामने राज ठाकरे और भीम आर्मी, बढ़ा विवाद

    साहिल वाकोडे केस में आमने-सामने राज ठाकरे और भीम आर्मी, बढ़ा विवाद

    मुंबई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे में बीटेक के छात्र साहिल वाकोडे की मृत्यु का मामला निरंतर सुर्खियों में बना हुआ है। मृतक छात्र के स्वजनों ने संस्थान में उसके साथ हुए जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन आरंभ कर दी है। इसी मध्य, इस घटनाक्रम पर मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा दिए गए वक्तव्य को लेकर राजनीतिक व सामाजिक हलकों में विवाद उत्पन्न हो गया है।

    जातिगत राजनीति से परे रहने का आह्वान

    मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर इस घटना को अत्यंत दुखद करार दिया। उन्होंने कहा कि उन मूल कारणों का गहन विश्लेषण किया जाना चाहिए, जिनके दबाव में आकर छात्र को ऐसा आत्मघाती कदम उठाने पर विवश होना पड़ा। उन्होंने मौजूदा शिक्षा प्रणाली की विसंगतियों और विद्यार्थियों पर निरंतर बढ़ते मानसिक तनाव को इस मामले का केंद्रीय बिंदु बताया।

    उन्होंने आगे कहा कि जाति एवं धर्म के विषयों का उपयोग अक्सर आम जनमानस को वास्तविक समस्याओं से भटकाने के लिए किया जाता है। उन्होंने छात्र समुदाय से किसी भी प्रकार की संकीर्ण राजनीति से दूर रहने का आग्रह करते हुए कहा कि शैक्षणिक व्यवस्था की त्रुटियों का निवारण करना ही साहिल एवं तनावग्रस्त होकर जान गंवाने वाले अन्य विद्यार्थियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

    भीम आर्मी का कड़ा विरोध और चेतावनी

    राज ठाकरे के इस बयान पर भीम आर्मी (महाराष्ट्र) ने तीव्र आपत्ति व्यक्त की है। संगठन का मत है कि जब पीड़ित परिवार ने प्रत्यक्ष रूप से जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, तो उन्हें केवल 'जातिगत राजनीति' कहकर खारिज करना अनुचित है।

    संगठन के अनुसार, शिकायत के आधार पर पुलिस प्रकरण दर्ज कर जांच कर रही है। ऐसी स्थिति में निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आरोपों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच होनी चाहिए। संगठन का यह भी मानना है कि शैक्षणिक दबाव और सामाजिक/जातीय भेदभाव दो भिन्न विषय हैं। अतः दोनों ही पहलुओं की समान गंभीरता से निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

    पारदर्शी जांच और सार्वजनिक क्षमा की मांग

    भीम आर्मी का कहना है कि महाराष्ट्र के एक उदीयमान छात्र की मृत्यु का वास्तविक सत्य केवल निष्पक्ष विवेचना से ही सामने आ सकता है। स्वजनों द्वारा उठाए गए प्रश्नों की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

    संगठन ने राज ठाकरे से अपने वक्तव्य पर पुनर्विचार करने और पीड़ित परिवार से क्षमा मांगने की मांग की है। इसके साथ ही दो दिवस के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की चेतावनी दी है। मांग पूरी न होने की दशा में शिवाजी पार्क स्थित मनसे कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है।

    हॉस्टल परिसर में घटित हुई थी घटना

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग संकाय में बीटेक द्वितीय वर्ष के 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे को 18 सितंबर की संध्या पवई स्थित संस्थान के हॉस्टल कक्ष में मृत पाया गया था। यह घटना मध्यावधि परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन एवं एआई तकनीक के कथित अनुचित उपयोग में पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद घटित हुई। प्रोफेसर डुल्ला उस समय परीक्षा वीक्षक (इन्विजिलेटर) के दायित्व पर थे।

    दूसरी ओर, मृतक के माता-पिता का दावा है कि उनके पुत्र ने अपने साथ हो रहे जातीय दुर्व्यवहार के संबंध में पूर्व में सूचित किया था। परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए घटना से जुड़े प्रत्येक बिंदु की सूक्ष्मता से जांच कर रही है।

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