नई दिल्ली। अचानक आने वाली वित्तीय जरूरतों के समय हर निवेशक के सामने यह दुविधा होती है कि वह अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को समय से पहले तोड़े या फिर उसके एवज में लोन लें। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, एफडी तोड़ने के बजाय उस पर लोन लेना एक अधिक समझदारी और फायदेमंद विकल्प माना जाता है, जिससे आप कई तरह के वित्तीय नुकसान से बच सकते हैं।
एफडी तोड़ने पर होने वाला नुकसान
यदि आप जरूरत पड़ने पर अपनी एफडी को मेच्योरिटी से पहले ही तोड़ देते हैं, तो बैंकों द्वारा कुछ नियम लागू किए जाते हैं:
ब्याज दर में कमी: बैंक समय से पहले एफडी तोड़ने पर निर्धारित ब्याज दर घटा देते हैं (प्री-मैच्योर विड्रॉल पेनल्टी)।
कमाई का घाटा: उदाहरण के लिए, यदि आपके पास 5 लाख रुपये की 7% ब्याज वाली एफडी है और आप 6 महीने बाद उसे तोड़ते हैं, तो बैंक ब्याज दर घटाकर 5% कर सकता है। इससे आपको केवल 12,500 रुपये ही ब्याज मिल पाएगा, जबकि पूरे साल में यह संभावित ब्याज 35,000 रुपये हो सकता था। इस प्रकार आपको सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।
एफडी पर लोन लेना क्यों है बेहतर विकल्प?
एफडी को बरकरार रखते हुए उस पर लोन लेने से आपकी मूल जमा राशि सुरक्षित रहती है और कई लाभ मिलते हैं:
ब्याज पर कमाई जारी रहना: जब आप एफडी पर लोन लेते हैं, तो आपकी मूल एफडी पर मिलने वाला ब्याज (जैसे 7%) लगातार मिलता रहता है।
कम ब्याज दर का बोझ: आमतौर पर बैंक एफडी पर मिलने वाली ब्याज दर से लगभग 1% से 2% अधिक (यानी करीब 8.5%) ब्याज दर पर लोन देते हैं।
उदाहरण से समझें: यदि आप 3 लाख रुपये का लोन लेते हैं, तो 6 महीने के लिए आपको लगभग 12,750 रुपये ब्याज चुकाना होगा, लेकिन साथ ही आपकी मुख्य एफडी पर पूरा ब्याज भी मिलता रहेगा।
निष्कर्ष
अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर एफडी को तोड़ने से बेहतर है कि आप बैंक से उस पर ओवरड्राफ्ट या लोन की सुविधा लें। यह तरीका न केवल आपकी बचत को सुरक्षित रखता है, बल्कि मेच्योरिटी पर मिलने वाले पूरे लाभ से भी आपको वंचित नहीं होने देता।


