मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी फेरबदल के संकेत मिलने लगे हैं। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत के एक हालिया दावे के बाद राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। राउत ने दावा किया है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। इस बयान के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या आने वाले समय में राज ठाकरे विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं।
संजय राउत का बड़ा दावा और राहुल-राज की बातचीत
मुंबई में मीडिया से चर्चा के दौरान जब संजय राउत से यह सवाल किया गया कि क्या राज ठाकरे विपक्ष की आवाज बन रहे हैं और क्या उन्हें 'इंडिया' गठबंधन में शामिल किया जाएगा, तो उन्होंने सीधा जवाब देते हुए कहा कि राज ठाकरे और राहुल गांधी के बीच सीधा संवाद है। उन्होंने कहा कि देश के सभी विपक्षी दल एक-दूसरे के लगातार संपर्क में हैं। राउत के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहा आंदोलन इसी आपसी संवाद और एकजुटता का परिणाम है।
विपक्षी बैठक का मुख्य एजेंडा और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
संजय राउत ने स्पष्ट किया कि 'इंडिया' गठबंधन की इस बैठक का मुख्य एजेंडा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ ठोस रणनीति तैयार करना है। उन्होंने बताया कि राज ठाकरे को गठबंधन में शामिल करने का विषय फिलहाल आज की बैठक के एजेंडे में नहीं है, हालांकि इस पर भविष्य में विचार किया जा सकता है। राउत ने यह भी जानकारी दी कि मुंबई में होने वाले बड़े आंदोलन की तैयारियों के कारण उद्धव ठाकरे और अन्य नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए।
संजय राउत के दावे पर राज ठाकरे की प्रतिक्रिया
आज दोपहर मुंबई में आयोजित ठाकरे बंधुओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने संजय राउत के बयान पर राज ठाकरे से सवाल किया। इस पर मंच पर मौजूद संजय राउत ने खुद बीच में आकर स्पष्ट किया कि उनका आशय विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच आपसी संवाद से था। राउत की इस सफाई पर राज ठाकरे ने उनकी तरफ देखकर सहमति में सिर हिलाया।
4 अक्टूबर को उद्धव सेना और मनसे का साझा मोर्चा
महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने हाथ मिला लिया है। चुनाव आयोग के खिलाफ आगामी 4 अक्टूबर को मुंबई में एक बड़े मोर्चे का ऐलान किया गया है। इस साझा विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तय करने के लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मिलकर संयुक्त रणनीति तैयार की है, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं।


